देहरादून । चमोली जिले में एक स्कूल में छात्र-छात्राओं के साथ यौन शोषण की जघन्य घटना के बाद उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज पूरे प्रदेश के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों के लिए तत्काल प्रभाव से एक व्यापक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रमुख बिंदु:
· सभी विद्यालयों में प्रवेश द्वार, गलियारों तथा खेल मैदान सहित संवेदनशील स्थानों पर कार्यशील सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है।
· प्रत्येक विद्यालय में महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती तथा महिला शिक्षकों का प्रतिशत बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
· स्कूल बसों में महिला अटेंडेंट के साथ-साथ जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम को भी अनिवार्य बनाया गया है।
· विद्यालय परिसर में अज्ञात व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित होगा। आगंतुकों के लिए पहचान पत्र जांच एवं रजिस्टर में प्रवेश दर्ज करना आवश्यक होगा।
· प्रत्येक माह होने वाली अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की बैठक में सुरक्षा ऑडिट एक निश्चित एजेंडा होगा।
· विद्यार्थियों के लिए ‘सुरक्षित स्पर्श-असुरक्षित स्पर्श’ जैसे जागरूकता कार्यक्रम प्रति तिमाही आयोजित किए जाएंगे।
· हर स्कूल में शिकायत पेटी तथा राज्य-स्तरीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।
कैसे होगी निगरानी?
· प्रत्येक जिले में मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित की जाएगी, जो इन उपायों के अनुपालन पर नज़र रखेगी।
· सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को 10 दिसंबर तक एक प्रारंभिक कार्य-योजना की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
· देहरादून, हरिद्वार तथा ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में 15 दिसंबर तक सभी विद्यालयों का सुरक्षा ऑडिट पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
· निजी विद्यालयों को 31 दिसंबर, 2025 तक इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा रिपोर्ट देने को कहा गया है। अनुपालन न करने पर संबंधित विद्यालय की मान्यता रद्द की जा सकती है।
· पहाड़ी एवं दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों की निगरानी के लिए विशेष मोबाइल निरीक्षण दल गठित किए जाएंगे।
शिक्षामंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा“चमोली की दर्दनाक घटना ने हम सभी को झकझोर दिया। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे के साथ भविष्य में ऐसी अनहोनी न हो। दोषी कर्मियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
बाल अधिकार कार्यकर्ताअनीता रावत ने इन कदमों का स्वागत करते हुए कहा, “यह एक सही दिशा में उठाया गया कदम है। सबसे महत्वपूर्ण अब इन नीतियों का सख्ती से और पारदर्शिता के साथ क्रियान्वयन है।”
पृष्ठभूमि
चमोली जिले के एक सरकारी विद्यालय में छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) गठित की थी। इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस घटना ने पूरे प्रदेश में स्कूली सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
उत्तराखंड में लगभग 30,000 सरकारी व निजी विद्यालय हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। अब सभी की निगाहें इन नए दिशा-निर्देशों के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर टिकी हैं।

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