सीएम धामी ने किया निरीक्षण, पीएम मोदी-अमित शाह ने फोन पर लिया जायजा
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पर कुदरत का क्रूर प्रहार हुआ है। कल रात देर से शुरू हुई मूसलाधार बारिश और सहस्त्रधारा क्षेत्र में बादल फटने की घटना ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। आसन, सौंग, टोंस और तमसा जैसी नदियां उफान पर आ गईं, जिससे कई पुल ध्वस्त हो गए, सड़कें बह गईं, घर-दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं और जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया। अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5-8 लोग लापता बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने फोन पर स्थिति की जानकारी ली और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
बादल फटने का भयावह मंजर: पुल टूटे, नदियां रौद्र रूप में
कल रात करीब 12 बजे सहस्त्रधारा के करलीगढ़ क्षेत्र में बादल फटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा बाजारों में घुस आया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह ऐसी भयानक घटना थी जो उन्होंने कभी नहीं देखी। सहस्त्रधारा रोड पर स्थित दुकानें और होटल पानी के तेज बहाव में बह गईं, जबकि आईटी पार्क और टपकेश्वर महादेव मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गया। मंदिर के बाहर लगी शिव मूर्ति बह गई और हनुमान प्रतिमा तक पानी पहुंच गया, हालांकि गर्भगृह सुरक्षित रहा।

मालदेवता क्षेत्र में सौंग नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि 15 सालों में पहली बार यह रोड को काटती हुई बहने लगी। यहां 100 मीटर लंबी सड़क धंस गई। देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास पुल का एक हिस्सा टूटकर बह गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रेमनगर नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर बना पुल भी ध्वस्त हो गया, जिससे चकराता और विकासनगर का देहरादून से संपर्क कट गया। मसूरी-देहरादून मार्ग पर भूस्खलन से कई जगह सड़कें बंद हो गईं, जबकि आसन नदी के उफान ने उत्तरांचल यूनिवर्सिटी और सीमा डेंटल कॉलेज के आसपास के इलाकों को प्रभावित किया।
जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार, सहस्त्रधारा में 192 मिमी, मालदेवता में 141.5 मिमी और फुलेट में 92.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। संतला देवी, डालनवाला, टपकेश्वर और फन वैली जैसे पर्यटन स्थल तबाह हो गए। कई कारें मलबे में दब गईं, जबकि आसन्न नदी में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार 13 मजदूर बह गए, जिनमें से 5 के शव बरामद हो चुके हैं। कुल 584 लोग फंस गए, जिनमें से 500 को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है।

सीएम धामी का निरीक्षण: राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुबह सबसे पहले सहस्त्रधारा, रायपुर, केसरवाला और मालदेवता क्षेत्रों का दौरा किया। जेसीबी पर चढ़कर उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों का जायजा लिया। धामी ने कहा, “यह एक बड़ी आपदा है, जिसमें जान-माल की भारी क्षति हुई है। घर, सरकारी संपत्ति और आजीविका प्रभावित हुई है। हम सभी विभागों के साथ मिलकर राहत कार्य चला रहे हैं।” उन्होंने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीडब्ल्यूडी और स्थानीय प्रशासन को रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए। देवभूमि इंस्टीट्यूट में फंसे 200 छात्रों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि पंचकुली में 30 लोगों का रेस्क्यू जारी है।
धामी ने स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर से लगातार समीक्षा की और प्रभावितों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जलस्तर बढ़ने पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा न करने, भूस्खलन स्थलों से दूर रहने और झुग्गीवासी सुरक्षित जगह शिफ्ट होने की अपील की है। सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और रेड अलर्ट जारी है।

केंद्र का साथ: पीएम मोदी और अमित शाह ने की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह सीएम धामी से फोन पर बात की और बाढ़-भूस्खलन की पूरी जानकारी ली। उन्होंने राज्य को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी धामी से स्थिति पर चर्चा की और केंद्र सरकार के समर्थन की पुष्टि की। धामी ने कहा, “पीएम और गृह मंत्री ने सभी विवरण लिए और सहायता का भरोसा दिलाया। केंद्र उत्तराखंड के साथ खड़ा है।” अप्रैल से अब तक राज्य में 85 मौतें, 128 घायल और 94 लापता हो चुके हैं।
विशेषज्ञों की चिंता: अनियोजित विकास आपदाओं को न्योता
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों पर अनियोजित निर्माण और जंगलों की कटाई ने आपदाओं को और भयावह बना दिया है। मालदेवता और सहस्त्रधारा जैसे पर्यटन क्षेत्रों में बेतरतीब विकास ने नदियों का प्राकृतिक बहाव बाधित किया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पहले कभी इतना मलबा नहीं आया। निर्माण कार्यों ने नदियों को संकरा कर दिया।” मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी दी है।
प्रशासन ने राहत शिविर लगाए हैं और प्रभावितों को भोजन, पानी व बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

रूट डायवर्शन लागू हैं
प्रशासन द्वारा देहरादून से विकासनगर के लिए पंडितवाड़ी-रंगड़वाला तिराहा और सिगनीवाला तिराहा से वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। यह आपदा न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड को हिला रही है, जहां अप्रैल से करोड़ों का नुकसान हो चुका है। राहत कार्य जारी हैं, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि क्या हम सबक लेंगे ?

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