देहरादून। नर्सिंग एकता मंच द्वारा बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर आंदोलन की शुरुआत कर दी गई है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और वर्षवार चयन व्यवस्था को लागू करने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने वर्षों बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, ऐसे में वर्षवार चयन व्यवस्था के बिना पुराने अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
इस आंदोलन को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. हरक सिंह रावत ने समर्थन देते हुए कहा कि नर्सिंग समुदाय की आवाज को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नियमों में बार-बार परिवर्तन युवाओं के साथ अन्याय है और इससे उनकी वर्षों की मेहनत और तैयारी प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, 2014–15 के अभ्यर्थी 2024–25 पासआउट छात्रों के साथ समान रूप से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। इसलिए वर्षवार भर्ती प्रणाली ही न्यायसंगत होगी, जैसा कि पूर्व में होता आया है।

डॉ. रावत ने नर्सिंग अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कोई भी मांग अनुचित नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले नर्सिंग कर्मियों ने हर कठिन परिस्थिति में देश की सेवा की है, अतः उनकी उपेक्षा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह जल्द से जल्द इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले, ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
अभ्यर्थियों ने भी स्पष्ट कहा है कि जब तक सरकार भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और वर्षवार चयन के आधार पर लागू नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। नर्सिंग एकता मंच का यह संघर्ष स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती और युवाओं के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और अब इस आंदोलन ने सरकार को विचार करने के लिए बाध्य कर दिया है।

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