एसएसपी अजय सिंह बोले— लालच, फर्जी वेबसाइट और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों से रहें सावधान
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साइबर क्राइम टीम ने निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के अपराध-मुक्त उत्तराखंड के संकल्प और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखंड अजय सिंह के नेतृत्व में साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और साइबर ठगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत इस बड़ी सफलता को अंजाम दिया गया।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि अज्ञात साइबर ठगों ने उसे निवेश पर अधिक लाभ कमाने का झांसा दिया। आरोपियों ने विभिन्न बैंक खातों में धनराशि जमा करवाकर पीड़ित से कुल 1 करोड़ 31 लाख रुपये की साइबर ठगी कर ली। इस संबंध में साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा अपराध संख्या 62/2025 के तहत धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा धारा 66(D) आईटी एक्ट में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी एसटीएफ के निर्देशन तथा सहायक पुलिस अधीक्षक साइबर कुश मिश्रा के निकट पर्यवेक्षण में विवेचना तेज की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता से धोखाधड़ी कर ट्रांसफर कराई गई रकम के लाभार्थी खाताधारकों, रजिस्टर्ड ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इस तकनीकी पड़ताल में महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर गिरोह के सदस्यों की पहचान की गई।
जांच में प्रकाश में आया कि देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में वांछित आरोपी पर्तीक उत्तम बाफना, आशीष कुमार और मोहम्मद श्रीम उर्फ नासिर इस फर्जीवाड़े में संलिप्त थे। पुलिस ने तीनों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—
- पर्तीक उत्तम बाफना, पुत्र उत्तम देशमुख बाफना, निवासी 504, चंदू निवास, बिल्डिंग बीपी रोड, कांग्रेस ऑफिस के सामने, भायंदर (ईस्ट), ठाणे, महाराष्ट्र, उम्र 32 वर्ष।
- आशीष कुमार, पुत्र संतोष कुमार पांडेय, निवासी 2B/S4 नीरज पार्क, सीएचएस रोड, आरएनपी पार्क, भायंदर ईस्ट, ठाणे, महाराष्ट्र-401105, उम्र 27 वर्ष।
- मोहम्मद श्रीम उर्फ नासिर, पुत्र रिजवान, निवासी A303 शिवम अपार्टमेंट, लक्ष्मीबेन छेड़ा मार्ग, वसई, पालघर, महाराष्ट्र, उम्र 31 वर्ष।

इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में निरीक्षक अनिल कुमार, अपर उपनिरीक्षक गोपाल सिंह और अपर उपनिरीक्षक पवन कुमार शामिल रहे। टीम की तत्परता और तकनीकी दक्षता के चलते इस हाई-वैल्यू साइबर फ्रॉड का खुलासा संभव हो सका।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने इस अवसर पर जनता से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि अंजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल पर बातचीत न करें और न ही किसी को अपने दस्तावेज या व्यक्तिगत जानकारी साझा करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कोई भी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती।
उन्होंने लोगों को आगाह किया कि किसी भी लोक-लुभावने ऑफर, फर्जी वेबसाइट, धनराशि दोगुनी करने के प्रलोभन, यूट्यूब लाइक-सब्सक्राइब आधारित कमाई योजनाओं तथा टेलीग्राम आधारित निवेश ऑफरों के झांसे में न आएं। उन्होंने यह भी कहा कि गूगल पर खोजकर किसी भी कस्टमर केयर नंबर पर आंख बंद करके भरोसा न करें, क्योंकि साइबर ठग अब निवेश योजनाओं, नकली रिव्यू प्रोग्रामों और झूठे इनामों के जरिए लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें धीरे-धीरे भारी निवेश के लिए फंसाते हैं।
एसटीएफ ने स्पष्ट किया कि तेजी से बढ़ रहे इन्वेस्टमेंट स्कैम्स ने देशभर में लाखों लोगों को अपना शिकार बनाया है। ठग पहले छोटे-छोटे फायदे या इनाम देकर भरोसा कायम करते हैं, फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर लोगों को चपत लगा देते हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कम समय में अधिक लाभ के लालच में निवेश न करें और किसी भी तरह का संदेह होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। साथ ही, वित्तीय साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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