ख़र्तूम ,02 सितंबर। गृह युद्ध से जूझ रहे सूडान में लगातार हो रही बारिश के बाद आए भीषण भूस्खलन से कम से कम 1,000 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना में पूरा गांव ही तबाह हो गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि भूस्खलन में जहां गांव के सभी लोग काल का ग्रास बन गए, वहीं केवल एक व्यक्ति जिंदा बच गया। बचाव टीमों ने राहत कार्य शुरू करते हुए मलबे से शवों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
सूडान लिबरेशन मूवमेंट आर्मी का नेतृत्व करने वाले अब्देलवाहिद मोहम्मद नूर ने बताया कि पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में पर्वतीय गांव मार्रा कई दिनों की भारी बारिश के कारण रविवार को अचानक भूस्खलन हो गया। इसमें पूरा गांव जमींदोज हो गया। उन्होंने बताया कि इस घटना में कम से कम 1,000 लोगों की मौत हो गई, जबकि केवल एक व्यक्ति जिंदा बचा है। वह हादसे के मंजर को याद करके पूरी तरह से सहम गया है।
दारफुर क्षेत्र में स्थित इस गांव पर नियंत्रण रखने वाले विद्रोही समूह ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों से पीड़ितों के शवों को बरामद करने में मदद की अपील की है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। समूह ने कहा, प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि गांव के सभी निवासियों की मौत हो गई है। अनुमान है कि 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, केवल एक ही जीवित बचा है।
बता दें कि सूडानी सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच शुरु हुए गृह युद्ध के कारण अपने घरों से निकलने पर मजबूर होने के बाद उत्तरी दारफुर राज्य के कई निवासियों ने मार्रा पर्वत क्षेत्र में शरण ली थी। दारफुर के सेना समर्थक गवर्नर मिन्नी मिन्नावी ने भूस्खलन की घटना को मानवीय त्रासदी बताया है। उन्होंने कहा कि गृह युद्ध से जूझ रहे लोगों के लिए यह प्राकृतिक आपदा सब कुछ खत्म करने वाली रही है।
अप्रैल 2023 में सूडानी सेना और आरएसएफ के बीच छिड़े गृह युद्ध ने देश को अकाल की स्थिति में धकेल दिया है और पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में नरसंहार के आरोप लगे हैं। गृह युद्ध में मरने वालों की संख्या के अनुमान में काफी भिन्नता है, लेकिन अमेरिकी अधिकारी के अनुमान के अनुसार, 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से डेढ़ लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। लगभग 1.20 करोड़ लोग अपने घरों को छोड़कर भाग गए हैं।
सूडान में बारिश के बाद आए भूस्खलन में 1,000 लोगों की मौत, तबाह हुआ पूरा गांव
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