मुख्य सचिव ने सौर ऊर्जा प्रणाली व जल गुणवत्ता पर दिए अहम निर्देश
देहरादून,02अप्रैल 2025: मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में विश्व बैंक सहायता प्राप्त अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उत्तराखंड जलापूर्ति कार्यक्रम (2018-2025) से संबंधित 12वीं उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और सौर ऊर्जा प्रणाली को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को निर्देश दिए कि ट्यूबवेल पर बिजली खर्च की बचत के लिए खाली स्थानों की मैपिंग कर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने की कार्ययोजना पर कार्य किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ट्यूबवेल लगाने से पहले भूजल स्तर की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्राप्त की जाए और संकटग्रस्त पेयजल क्षेत्रों की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
जल गुणवत्ता और ऊर्जा दक्षता पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने जलापूर्ति कार्यक्रम के तहत “गुड प्रैक्टिसेज” को जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने 100 प्रतिशत जल गुणवत्ता, 16 घंटे जलापूर्ति, ऊर्जा दक्षता में सुधार, ग्राहकों की संतुष्टि और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए। बैठक में उत्तराखंड पेयजल निगम और उत्तराखंड जल संस्थान की विभिन्न योजनाओं के अंतिम परिवर्तन को भी मंजूरी दी गई।
प्रोजेक्ट की प्रगति और उपलब्धियां
बैठक में जानकारी दी गई कि ₹1042 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की समाप्ति 30 जून 2025 तक निर्धारित है। इसमें ₹834 करोड़ का योगदान विश्व बैंक और ₹208 करोड़ का योगदान उत्तराखंड सरकार का है। यह परियोजना देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के 22 शहरों में संचालित हो रही है।

इस परियोजना के तहत 135 एलपीसीडी (लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) के मानक के अनुसार 4.35 लाख लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। साथ ही, 100 प्रतिशत वॉल्यूमेट्रिक टैरिफ के साथ मीटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
22 पेयजल योजनाएं पूरी, 24% अधिक कनेक्शन
पेयजल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के तहत अब तक 22 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 1,08,755 नए जल कनेक्शन दिए गए हैं, जो लक्ष्य से 24 प्रतिशत अधिक हैं। विश्व बैंक ने प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त किया है।
बैठक में सचिव पेयजल, वित्त सहित संबंधित विभागों के अपर सचिव और अधिकारी मौजूद रहे।

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