स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगी यूपी की 14 लखपति दीदियाँ, लाल किले से गूंजेगी ग्रामीण नारी सशक्तिकरण की गाथा

लखनऊ 7 अगस्त (आरएनएस ),देश की आज़ादी के राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त को राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह की साक्षी बनने का अवसर इस वर्ष उत्तर प्रदेश की 14 लखपति दीदियों को मिलेगा। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी ये महिलाएं न केवल स्वयं सहायता समूहों के ज़रिए आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अब स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होकर प्रदेश की ग्रामीण महिला शक्ति का गौरव भी बढ़ाएंगी।इस पहल का श्रेय उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में चल रहे मिशन को जाता है, जिसके अंतर्गत लाखों महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर हो रही हैं। लखपति दीदियों में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर खासा उत्साह है।इन चयनित दीदियों के साथ उनके पति या एक सहयोगी भी दिल्ली यात्रा पर जाएंगे। उनके साथ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के दो विशेष प्रतिनिधि भी रहेंगे। 13 अगस्त को सुबह 10 बजे, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 7-कालिदास मार्ग स्थित अपने कैम्प कार्यालय से उन्हें बस द्वारा दिल्ली रवाना करेंगे। 14 अगस्त को सभी दीदियाँ राजधानी दिल्ली में निर्धारित स्थलों का भ्रमण करेंगी और 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित राष्ट्रीय ध्वजारोहण कार्यक्रम में भाग लेंगी।उप मुख्यमंत्री मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दीदियों की यात्रा, ठहरने और अन्य सभी व्यवस्थाएं गरिमापूर्ण व नियमानुसार सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि इन दीदियों की भागीदारी नारी सशक्तिकरण, सामूहिक शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की भावना को नई ऊँचाई प्रदान करेगी।राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने जानकारी दी कि ये सभी दीदियाँ स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगी। दिल्ली यात्रा पर जाने वाली लखपति दीदियाँ निम्नलिखित हैं:हरदोई से ममता जौहर, झाँसी से निशा देवी, सुल्तानपुर से ललिता मौर्य, देवरिया से रेणु देवी, लखीमपुर खीरी से उमा देवी, रुचि वर्मा और सुनीता देवी, फतेहपुर से कांति देवी और लक्ष्मी देवी, मिज़ार्पुर से शशिबाला सोनकर और राखी कृष्णा सिंह, संत कबीर नगर से विंद्रावती देवी और संतोषी देवी, तथा सोनभद्र से निर्मला देवी।इन दीदियों की उपस्थिति न केवल उनके संघर्ष और सफलता को राष्ट्रीय मान्यता देगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि भारत की आत्मनिर्भरता की नींव गाँव की महिला शक्ति से जुड़ी है।

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