देहरादून।उत्तराखंड में तैनात उन 18 हजार बेसिक शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है, जो बिना टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के सेवा दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए सभी बेसिक शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य करने के आदेश दिए थे। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति पाँच वर्ष से कम है, उन्हें राहत दी जाएगी, जबकि शेष को दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। आदेश के बाद से राज्य के हज़ारों शिक्षकों की सेवाओं और पदोन्नति पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
कैबिनेट में उठाया गया मुद्दा
कबिनेट के एजेंडे में औपचारिक रूप से शामिल न होने के बावजूद शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस मुद्दे को सदन में रखा। उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर अपनी चिंताएं साझा की थीं। स्थिति की गंभीरता देखते हुए सभी मंत्रियों ने एकमत होकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को मंजूरी दी।
शिक्षकों ने जताया आभार
राज्यभर के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल से जुड़े संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि कैबिनेट ने जनहित में संवेदनशीलता दिखाते हुए बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने भी इसे “समाधान की राह खोलने वाला कदम” बताते हुए कहा कि अब शिक्षक हित में मजबूत दलीलों को सुप्रीम कोर्ट में रखा जा सकेगा।संघ के अध्यक्ष विनोद थापा और महामंत्री जगवीर खरोला ने ऐलान किया कि 25 सितंबर को शिक्षक संघ राज्य भर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजेंगे, ताकि संसद में अध्यादेश लाकर भी स्थायी समाधान निकाला जा सके।
व्यावहारिक दिक्कतें भी रखी जाएंगी
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सेवा करते-करते उम्र सीमा पार कर चुके शिक्षक अब टीईटी पात्रता परीक्षा में शामिल ही नहीं हो पाएंगे। वहीं, पूर्व में बनी शैक्षिक पात्रताओं और वर्तमान पात्रता नियमों में बड़ा अंतर है। कई शिक्षक डीपीएड, बीपीएड व सीपीएड जैसी डिग्रियों के आधार पर चयनित हुए थे, लेकिन अब इन्हें टीईटी के लिए मान्य ही नहीं किया गया है।राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कैबिनेट का यह फैसला व्यावहारिक दिक्कतों को सामने रखकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष रखने का अवसर देगा। ऐसी उम्मीद जताई गई कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई से असमंजस दूर होगा और हज़ारों शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित हो सकेगी।

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