

देहरादून। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में पर्यटन को नई उड़ान देने के लिए करीब 350 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं को मंजूरी दी है। राज्यसभा में प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद महेंद्र भट्ट के सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पार्किंग, स्वच्छता, डिजिटल कनेक्टिविटी और अंतिम छोर तक पहुंच को प्राथमिकता देते हुए यह राशि खर्च की जाएगी। सरकार का फोकस पर्वतीय राज्यों में पर्यटक अनुभव बेहतर करना, स्थायी पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना है।
उत्तराखंड को यह फंड मुख्य रूप से चार योजनाओं के तहत मिला है। स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र को इको-टूरिज्म और एडवेंचर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने के लिए 69.17 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। प्रशाद और सीबीडी योजना में केदारनाथ के एकीकृत विकास के लिए 34.77 करोड़, बद्रीनाथ में तीर्थयात्री सुविधाओं के उन्नयन के लिए 56.15 करोड़ और गंगोत्री-यमुनोत्री में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 54.36 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
विरासत और ग्राम पर्यटन के तहत कुमाऊं हेरिटेज सर्किट कटारमल-जागेश्वर-बैजनाथ-देवीधुरा के लिए 76.32 करोड़, टी गार्डन एक्सपीरियंस के लिए 19.89 करोड़, गूंजी में इको-विलेज क्लस्टर के लिए 17.86 करोड़, उत्तरकाशी के जादुंग गांव के विकास के लिए 4.99 करोड़, कैंचीधाम परिसर के लिए 17.60 करोड़ और माना गांव में हाट के निर्माण के लिए 4.89 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा वैश्विक प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्र योजना के तहत ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है।
2014-15 से अब तक देशभर में स्वदेश दर्शन के तहत 5295.24 करोड़ की 76 परियोजनाएं, स्वदेश दर्शन 2.0 में 2207.08 करोड़ की 53 परियोजनाएं और प्रशाद व सीबीडी में 1726.74 करोड़ की 54 परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं। विरासत, आध्यात्मिक, पारिस्थितिकी और अमृत धरोहर श्रेणियों में 687.99 करोड़ की 37 परियोजनाओं को भी हरी झंडी मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में 23 राज्यों में वैश्विक स्तर के पर्यटन केंद्र विकसित करने के लिए 3295.76 करोड़ की 40 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
केंद्र सरकार सीमावर्ती गांवों को पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। गृह मंत्रालय की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड सहित 662 गांव चिन्हित किए गए हैं। इनके लिए 3065.32 करोड़ की 1248 परियोजनाएं मंजूर हैं, जिनमें 316 पूरी हो चुकी हैं। इसमें 2481.93 करोड़ से 111 सड़क परियोजनाएं, 528 गांवों में 4G कनेक्टिविटी, 625 गांवों में पेयजल और 621 गांवों में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही सौर ऊर्जा, माइक्रो-हाइडल, मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्कूल अवसंरचना भी इस योजना का हिस्सा है। सड़क मंत्रालय पीएम गति शक्ति के तहत लगभग 7.60 लाख करोड़ रुपये से 27,300 किमी की 1244 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं चला रहा है, जिनमें से 14,733 किमी का काम पूरा हो चुका है। इनमें कई परियोजनाएं सीधे धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ेंगी। सरकार का मानना है कि अवसंरचना में यह निवेश न केवल पर्यटकों की सुविधा बढ़ाएगा बल्कि पहाड़ों में आजीविका के नए रास्ते भी खोलेगा।

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