टीयर टू और थ्री शहरों में आईवीएफ हॉस्पिटल विस्तार की पहल
नई दिल्ली , 07 फरवरी (आरएनएस)।हमारी लाईफ स्टाइल और खराब खानपान ने शरीर को काफी नुकसान पहुंचाया है साथ ही डायबिटिज, अधिक उम्र, मोटापे और पीसीओएस के कारण कई महिलाओं को नि:संतानता का सामना करना पड़ता है, इसमें से कई मरीजों को इस समस्या के बारे में जानकारी भी नहीं है। कई दम्पती प्राकृतिक गर्भधारण और सामान्य उपचारों में सफलता नहीं मिलने पर हार मान लेते हैं जबकि आधुनिक उपचारों से नि:संतानता का उपचार संभव है। संतान सुख से वंचित दम्पतियों को उच्चस्तरीय उपचार सेवाएं प्रदान करने के लिए नि:संतानता के उपचार की देश की सबसे बड़ी फर्टिलिटी चैन इन्दिरा आईवीएफ ने महाराष्ट्र के फर्स्ट फ्लोर, रामा आर्केड जालना में आधुनिकतम हॉस्पिटल का शुभारंभ किया है। हॉस्पिटल का उद्घाटन मुख्य अतिथि सिविल सर्जन जालना डॉ. आर.एस. पाटिल, क्लास वन मेडिकल ऑफिसर हॉस्पिटल ट्रेनिंग सेंटर डॉ. बी.जे. घोलप, क्लास वन एनेस्थेटिस्ट डॉ. पी.एम. कुलकर्णी, पुलिस इंस्पेक्टर संदीप एस. भारती, सीनियर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सेंटर हेड इन्दिरा आईवीएफ छत्रपतिसंभाजी नगर डॉ. धोंडीराम भारती और जालना हॉस्पिटल हेड डॉ. स्वाति सानप (थोरवे) ने फीता काटकर किया। यह ग्रुप का महाराष्ट्र में 29 वां हॉस्पिटल है। इन्दिरा आईवीएफ ग्रुप के सीईओ तथा कॉ-फाउण्डर डॉ. क्षितिज मुर्डिया ने बताया कि महाराष्ट्र आर्थिक रूप से सक्षम माना जाता है लेकिन अभी भी यहां के दूरदराज के क्षेत्रों में नि:संतानता और इसके उपचार को लेकर जागरूकता काफी कम है इसके लिए इन्दिरा आईवीएफ ग्रुप लगातार प्रयास कर रहा है। ग्रुप के अत्याधुनिक हॉस्पिटल में एक ही छत के नीचे सारी नि:संतानता उपचार सुविधाएं उपलब्ध होने से दम्पतियों को दूर शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। इन्दिरा आईवीएफ से इलाज प्राप्त कर अभी तक एक लाख साठ हजार से अधिक दम्पतियों को आईवीएफ प्रेगनेंसी हो चुकी है। ग्रुप के देश-विदेश में 160 से अधिक लोकेशंस में अत्याधुनिक सुविधाओं वाले आईवीएफ हॉस्पिटल संचालित हैं। भारत में चिकित्सा ट्यूरिज्म सेगमेंट 2024 से 2034 तक 17.20 प्रतिशत सीएजीआर से बढऩे की उम्मीद है, जो 50,670.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर जाएगा। हमारा अनुमान है कि एआरटी उपचार निकट भविष्य में मेडिकल ट्यूरिज्म में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएगा। मुख्य अतिथि सिविल सर्जन जालना डॉ. आर.एस. पाटिल ने कहा कि नि:संतानता जैसे गंभीर विषय पर लोग बात नहीं करते हैं लेकिन इन्दिरा आईवीएफ ने इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाया और उपचार को पहुंच में आसान बनाया है। दम्पतियों को संतान सुख की ओर अग्रसर करने के लिए ग्रुप को बधाई देता हूं। सीनियर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सेंटर हेड इन्दिरा आईवीएफ छत्रपतिसंभाजी नगर डॉ. धोंडीराम भारती ने बताया कि भारत में हर 6 में से 1 दम्पती नि:संतानता की समस्या से प्रभावित हैं लेकिन उपचार विकल्पों की जानकारी नहीं होने के कारण मात्र दो प्रतिशत दम्पती ही आईवीएफ उपचार तकनीक का लाभ ले पाते हैं। इन्दिरा आईवीएफ के जालना हॉस्पिटल में नि:संतानता के कारण जानने के लिए समस्त प्रकार की जांचे और उपचार की आईयूआई, आईवीएफ, इक्सी, लेजर असिस्टेड हैचिंग, ब्लास्टोसिस्ट कल्चर, पीजीटी, क्लोज्ड वर्किंग चैम्बर जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं। इन्दिरा आईवीएफ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकों को उपचार में शामिल किया गया है ताकि दम्पतियों को सफलता मिलने की संभावना अधिक रहे। जालना हॉस्पिटल हेड डॉ. स्वाति सानप (थोरवे) ने बताया कि दुनियाभर में 80 लाख से ज्यादा दम्पतियों ने आईवीएफ से संतान सुख प्राप्त कर लिया है। महिलाओं में ब्लॉक ट्यूब, पीसीओएस, अनियमित माहवारी, बंद माहवारी, अधिक उम्र और पुरूषों में कम या खराब शुक्राणु, निल शुक्राणु नि:संतानता के कारण है, इन स्थितियों में दम्पतियों को एक साल तक प्रयास करने पर भी सफलता नहीं मिलने पर इंतजार करने के बजाय उपचार अपनाना चाहिए। नि:संतानता की स्थिति में दम्पती को एक्सपर्ट डॉक्टर से कन्सल्ट करके दोनों की जांचे करवानी चाहिए और कारण जानकर उपचार प्रक्रिया का निर्धारण करना चाहिए ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके। हॉस्पिटल उद्घाटन के अवसर पर 28 फरवरी तक नि:शुल्क नि:संतानता परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है जिसमें दम्पती एक्सपर्ट डॉक्टर से नि:शुल्क परामर्श का लाभ ले सकते हैं।
इन्दिरा आईवीएफ का महाराष्ट्र में 29वां हॉस्पिटल जालना में शुरू
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