देहरादून,10फरवरी2025।भारत के राष्ट्रीय खेलों के इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व ‘गो ग्रीन’ पहल की शुरुआत की गई है। इस महत्वपूर्ण कदम के तहत, 38वें राष्ट्रीय खेलों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए कई उपाय किए गए हैं।
मुख्य बातें:
- 100% आरपीईटी बोतलों का उपयोग: राष्ट्रीय खेलों में पहली बार 100% आरपीईटी (पुनर्नवीनीकृत पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट) बोतलों का उपयोग किया जा रहा है। यह प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- मिशन जीरो प्लास्टिक बोतल वेस्ट: क्लियर प्रीमियम वाटर ने राष्ट्रीय खेलों और उत्तराखंड सरकार के समर्थन से ‘मिशन जीरो प्लास्टिक बोतल वेस्ट’ लॉन्च किया है। इस मिशन के तहत, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खेलों में इस्तेमाल की गई सभी आरपीईटी बोतलें वापस एकत्र की जाएँ, जिससे कोई भी कूड़ा न फैले।
- 360° सर्कुलर इकोनॉमी और संधारणीयता अभियान: यह अभियान प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग और पुनर्चक्रण को एक साथ सुनिश्चित करता है। इसके तहत, बोतलों का उपयोग, संग्रह, पृथक्करण, निस्तारण और पुन: उपयोग किया जाएगा, जिससे एक परिपत्र अर्थव्यवस्था का चक्र बनेगा।
- अन्य महत्वपूर्ण पहल:
- प्रमुख स्थानों पर कांच की बोतलें रखी गई हैं।
- खेलों के दौरान एकत्र किए गए प्लास्टिक कचरे का उपयोग बेंच बनाने के लिए किया जाएगा।
- बोतल क्रशर मशीनों का उपयोग प्लास्टिक कचरे के कुशल प्रबंधन के लिए किया जा रहा है।
- कचरे को तीन श्रेणियों – सूखा कचरा, गीला कचरा और प्लास्टिक की बोतल के कचरे में अलग किया जा रहा है।
38वें राष्ट्रीय खेलों में ‘गो ग्रीन’ पहल की शुरुआत एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह भारत को एक जिम्मेदार और टिकाऊ राष्ट्र बनाने में भी मदद करेगा।

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