नई दिल्ली,14फरवरी2025(आरएनएस) राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत के प्रधानमंत्री के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस ऐतिहासिक संवाद में, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, और तकनीकी सहयोग के नए आयामों पर चर्चा की, जिससे भारत और अमेरिका के बीच “मेगा पार्टनरशिप” का गठन हुआ।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रम्प को उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका का सामंजस्यपूर्ण सहयोग बेहतर विश्व के निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने “मागा” (Make America Great Again) और “मीगा” (Make India Great Again) का उल्लेख करते हुए कहा, “जब अमेरिका और भारत एक साथ मिलकर काम करते हैं, तब बनता है ‘मेगा’ पार्टनरशिप जो समृद्धि को आकार देती है।”
500 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तेल और गैस व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर सहयोग बढ़ाने की भी योजना है।
रक्षा में नई पहल
रक्षा क्षेत्र में, भारत ने अमेरिका से सहयोग को और गहरा करने के लिए एक नई रणनीति अपनाने की योजना बनाई है। राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री ने संयुक्त विकास, उत्पादन और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर जोर दिया। इसके अलावा, ऑटोनॉमस सिस्टम इंडस्ट्री अलायंस की घोषणा की गई, जो रक्षा संसाधनों में सुधार लाने में सहायक होगी।
तकनीकी सहयोग पर ध्यान
भारत और अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम और बायोटेक्नोलॉजी समेत कई अन्य तकनीकों में सहयोग को तीव्र करने का आश्वासन दिया। TRUST (Transforming Relationship Utilizing Strategic Technology) पर सहमति बनी, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों और फार्मास्यूटिकल्स की सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता
भारत और अमेरिका के नेताओं ने सीमापार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाइयों की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रम्प का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने 2008 के मुंबई हमले के आरोपी को भारत के हवाले करने का निर्णय किया है।
संस्कृति और शिक्षा का सहयोग
भारतीय समुदाय को अमेरिका-भारत संबंधों का मजबूत कड़ी बताते हुए, प्रधानमंत्री ने लॉस एंजेलेस और बॉस्टन में नए कांसुलेट खोलने की योजना का जिक्र किया। इसके साथ ही, अमेरिकी विश्वविद्यालयों को भारत में ऑफशोर कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया गया।
इस प्रकार, भारत और अमेरिका ने अपने संबंधों को एक नई दिशा देने का संकल्प लिया है, जो भविष्य में और अधिक मजबूत और प्रभावी होगा।

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