चुनाव आयोग ने डुप्लीकेट EPIC नंबर की समस्या हल करने का लिया फैसला

नई दिल्ली, 07 मार्च 2025 (आरएनएस ) भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने दशकों से लंबित डुप्लीकेट EPIC (इलेक्ट्रोरल फोटो आईडी कार्ड) नंबर की समस्या को हल करने के लिए अगले तीन महीनों में ठोस कदम उठाने की घोषणा की है। यह फैसला तकनीकी टीमों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के साथ विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि EPIC नंबर की डुप्लिकेसी के बावजूद, कोई भी मतदाता केवल उसी मतदान केंद्र पर वोट डाल सकता है, जहां वह संबंधित मतदाता सूची में दर्ज है।

चुनावी सूची के अद्यतन की प्रक्रिया

चुनावी सूची को पारदर्शी और अद्यतन बनाए रखने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) हर वर्ष अक्टूबर-दिसंबर के बीच किया जाता है, जिसके अंतिम मतदाता सूची जनवरी में प्रकाशित होती है। SSR 2025 के तहत अंतिम सूची 10 जनवरी 2025 को प्रकाशित की गई।

इस प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने निम्नलिखित उपाय अपनाए हैं:

1. प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की नियुक्ति।

2. राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का अधिकार।

3. BLA को अपने संबंधित मतदान केंद्र की मतदाता सूची की जांच और किसी भी विसंगति की शिकायत करने की अनुमति।

4. BLO द्वारा घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन और फिर निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) को रिपोर्ट सौंपना।

5. संशोधन के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची को सार्वजनिक और राजनीतिक दलों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराना।

6. दावा-आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम सूची प्रकाशित करना।

7. यदि किसी को आपत्ति हो, तो वह RP एक्ट 1950 की धारा 24(a) के तहत जिला मजिस्ट्रेट (DM)/जिला कलेक्टर को अपील कर सकता है।

8. दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास RP एक्ट 1950 की धारा 24(b) के तहत की जा सकती है।

डुप्लीकेट EPIC नंबर की समस्या का समाधान

चुनाव आयोग ने माना कि EPIC नंबरों के आवंटन में गड़बड़ी के कारण कुछ मतदाताओं को डुप्लीकेट EPIC नंबर मिले हैं, लेकिन ये सभी मतदाता वास्तविक हैं। यह समस्या वर्ष 2000 में EPIC नंबर जारी करने की प्रक्रिया में विभिन्न राज्यों द्वारा अलग-अलग सीरीज के उपयोग के कारण उत्पन्न हुई।

अब आयोग ने फैसला किया है कि:

अगले तीन महीनों में प्रत्येक मतदाता को एक यूनिक नेशनल EPIC नंबर दिया जाएगा।

डुप्लीकेट EPIC नंबर वाले मौजूदा मतदाताओं के लिए नया यूनिक नंबर जारी किया जाएगा।

भविष्य के मतदाताओं को भी यह यूनिक EPIC नंबर मिलेगा ताकि आगे ऐसी समस्या न हो।

चुनाव आयोग के इस फैसले से मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ेगी और भविष्य में चुनावी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होगी।

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