देहरादून(आरएनएस)। सहकारिता चुनाव में नए सदस्यों को मतदान अधिकार देने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर भाजपा के भीतर मचे घमासान में अब सहकार भारती भी कूद गया है। संघ के अनुसांगिक संगठन सहकार भारती ने महिला आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ मोर्चा खोला। इसे सरकार का ऐतिहासिक फैसला करार दिया।
सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री अमित कुमार शर्मा ने कहा कि सहकारी समितियों समेत सहकारिता के हर सेक्टर में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग की गई थी। इसी मांग पर सरकार की ओर से महिला आरक्षण का लाभ देने को बकायदा कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर महिलाओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया। जो महिलाएं धरातल पर रह कर सहकारिता के मूल भाव को जिंदा रखे हुए हैं, इस महिला आरक्षण के बाद उन्हें इन समितियों समेत जिले और राज्य स्तर की शीर्ष संस्थाओं की कमान संभालने का मौका मिलेगा।
कहा कि इस महिला आरक्षण का विरोध वो लोग कर रहे हैं, जिन्होंने सहकारिता को अपने घर की संस्था बना दिया है। अपने पूरे परिवार को सहकारिता में एडजस्ट कर लाभ लिए जा रहे हैं। अब जब उन्हें खुद के सिस्टम से बाहर होने का खतरा महसूस हो रहा है, तो वे महिला आरक्षण के विरोध पर ही उतारु हो गए हैं। इससे साफ हो गया है कि उनका फोकस सिर्फ निजी हितों तक सीमित है। महिला आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।
महिलाओं के नेतृत्व से गड़बड़ी करने वालों को महसूस हो रहा खतरा
राज्य सहकारी बैंक के निवर्तमान निदेशक मनोज पटवाल ने कहा कि महिला आरक्षण से सहकारिता में महिलाओं का नया नेतृत्व विकसित होगा। इस नए उभरने वाले महिला नेतृत्व से उन लोगों को परेशानी हो रही है, जिन्होंने अभी तक सहकारिता में गड़बड़ियां की हैं। जिनका कार्यकाल विवादों में रहा है। पूरे परिवार को बोर्ड का हिस्सा बनाया। रिक्शा, ऋण, गिफ्ट समेत तमाम गड़बड़ियां हुईं। अब इन गड़बड़ियों की कलई खुलने के डर से पूरे महिला आरक्षण का ही विरोध शुरू कर दिया गया है।
सहकारिता महिला आरक्षण विवाद में सहकार भारती भी कूदा
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