देहरादून,22मार्च 2025(आरएनएस )उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में करोड़ों के सॉफ्टवेयर घोटाले का मामला और गहराता जा रहा है। इस घोटाले को दबाने के लिए तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रणजीत सिंह को रिश्वत की पेशकश किए जाने की सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। शासन ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
सचिव से संपर्क कर घोटाले को दबाने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, यूटीयू में सॉफ्टवेयर निर्माण में घोटाले की पोल खुलने के बाद लखनऊ की एक सॉफ्टवेयर कंपनी के प्रतिनिधि ने सचिव डॉ. रणजीत सिंह से मुलाकात की और घोटाले की जांच को धीमा करने के लिए घूस देने की पेशकश की। सचिव ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए तुरंत शासन को अवगत कराया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सख्त कार्रवाई की सिफारिश की।
घोटाले की उच्च स्तरीय जांच होगी
यूटीयू में सॉफ्टवेयर निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितताओं के उजागर होने के बाद सरकार ने उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन कर जांच के आदेश दिए थे। अब इस नए घटनाक्रम के बाद शासन ने जांच को और सख्त बनाने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस घोटाले में किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही और क्या घूसखोरी के प्रयासों में अन्य लोग भी शामिल थे।
शासन ने की सख्त कार्रवाई
शासन द्वारा गठित समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सचिव से मिलने आए कंपनी के प्रतिनिधि को भी पूछताछ के दायरे में लिया जा सकता है। इस बीच, सचिवालय स्तर पर भी इस मामले को लेकर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
क्या था मामला?
यूटीयू ने एक निजी कंपनी से सॉफ्टवेयर निर्माण का अनुबंध किया था, जिसमें कथित रूप से करोड़ों रुपये का गड़बड़झाला सामने आया। जांच में पता चला कि सॉफ्टवेयर के लिए अत्यधिक भुगतान किया गया और तय मानकों का पालन नहीं हुआ। इसके बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ और शासन ने जांच के आदेश दिए थे।
अब घोटाले को दबाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश के बाद इस प्रकरण ने और गंभीर रूप ले लिया है। शासन और तकनीकी शिक्षा विभाग इस पूरे मामले को लेकर बेहद सतर्क है और दोषियों पर जल्द ही कड़ी कार्रवाई होने की संभावना है।

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