मणिपाल फाउंडेशन के CSR से मिली नई उम्मीद: दुनिया का पहला लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांट

ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि: मेडिका अस्पताल ने किया दुनिया का पहला लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांट

देहरादून, 28 मार्च 2025 – मेडिका सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप का हिस्सा, ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल ने 33 वर्षीय महिला मरीज, जो गंभीर जन्मजात हृदय रोग टेट्रालॉजी ऑफ फेलॉट (TOF) से पीड़ित थी, में सफलतापूर्वक माइक्रा लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांट किया। यह प्रक्रिया दुनिया का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है।

मरीज की पृष्ठभूमि
बैरकपुर की रहने वाली मरीज (नाम बदलकर RM) का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उन्हें इस जटिल और महंगे इलाज का खर्च उठाने में कठिनाई हो रही थी। RM को जन्मजात हृदय रोग TOF था, जिसके कारण पहले ही इंट्राकार्डियक रिपेयर और ग्लेन शंट सर्जरी (पल्मोनरी रक्त प्रवाह बढ़ाने के लिए की गई एक प्रक्रिया) की जा चुकी थी। उनके पिछले एपिकार्डियल पेसिंग लीड में खराबी आ चुकी थी, जिसके चलते उन्हें स्थायी पेसमेकर की आवश्यकता थी। लेकिन उनकी जटिल शारीरिक संरचना के कारण पारंपरिक ट्रांसवेन्स पेसमेकर लगाना संभव नहीं था।

जटिल प्रक्रिया और टीम का योगदान
2024 तक मरीज की एपिकार्डियल लीड पूरी तरह फेल हो चुकी थी, जिससे वह अस्थायी पेसमेकर पर निर्भर थीं। उनकी जटिल हृदय संरचना के चलते केवल लीडलेस पेसमेकर ही एकमात्र विकल्प था। इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया का नेतृत्व मेडिका अस्पताल की कुशल टीम, जिसमें कार्डियक कैथ लैब के निदेशक डॉ. दिलीप कुमार, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी प्रमुख डॉ. अनिल कुमार सिंघी और कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. सोमनाथ डे शामिल थे, ने किया। 3 मार्च 2025 को मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया और 5 मार्च 2025 को सफल उपचार के बाद स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई।

डॉ. दिलीप कुमार ने इस सफलता पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह केस हमारी जानकारी के अनुसार दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है। इस सफलता ने जटिल हृदय रोगों के लिए नए विकल्प खोल दिए हैं।”

मणिपाल फाउंडेशन की सहायता
इस प्रक्रिया को सफल बनाने में मणिपाल फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फाउंडेशन ने मरीज की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सहयोग किया और उन्हें इस अत्याधुनिक चिकित्सा सेवा का लाभ दिलवाया।

डॉ. वसुंधा शेट्टी, सीनियर डायरेक्टर – बिजनेस ऑपरेशन्स, मणिपाल हॉस्पिटल्स – CSR, ने कहा, “मणिपाल फाउंडेशन का उद्देश्य जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना है। यह केस दर्शाता है कि कैसे CSR कार्यक्रम जीवन बदल सकते हैं।”

मरीज RM ने भावुक होकर अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा, “मेडिका अस्पताल और मणिपाल फाउंडेशन ने मुझे नई जिंदगी दी। अब मैं अपनी बच्ची के साथ सुरक्षित भविष्य का आनंद उठा सकती हूं।”

सामूहिक प्रयास और प्रेरणा
डॉ. अयनाभ देबगुप्ता, रीजनल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, मणिपाल हॉस्पिटल्स (ईस्ट), ने कहा, “हम पूर्वी भारत में सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सेवाएँ और तकनीक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह केस सामूहिक प्रयास और सामुदायिक सहयोग की ताकत को दर्शाता है।”

यह दुर्लभ चिकित्सा उपलब्धि सामूहिक प्रयास और उन्नत तकनीक की ताकत का प्रमाण है। इस केस ने ना सिर्फ मरीज के जीवन को बदला, बल्कि जटिल हृदय रोग चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत की है।

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