एमकेपी कॉलेज को बचाने के लिए सभी निस्वार्थ भाव से आगे आएं : सिन्हा

देहरादून। देहरादून एमकेपी पीजी कॉलेज को लेकर उच्च शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा ने महाविद्यालय से जुड़े तमाम पक्षों को सुना। सचिवालय सभागार में जनसुनवाई में डॉ.सिन्हा ने सभी पक्षों से अपील की कि वह एमकेपी कॉलेज को बचाने के लिए निस्वार्थ भाव से आगे आएं। उन्होंने महाविद्यालय की मौजूदा स्थिति को भी खुद ही बंया किया और कहा कि हम महाविद्यालय के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार कॉलेज समग्र विकास के लिए संकल्पित हैं। सरकार एमकेपी कॉलेज की व्यवस्थाओं को संभालने के लिए कंट्रोलर की नियुक्ति करने जा रही है। इसके लिए बाकयदा लोगों को आपत्ति दाखिल कर सुनवाई का मौका दिया गया। सुनवाई के दौरान तमाम पक्षों ने अपनी बात को रखा। बताया कि एमकेपी पी कॉलेज को संचालित करने वाली संस्था अभी अपंजीकृत श्रेणी में है। ऐसे में कॉलेज संचालन के लिए कोई मान्यता प्राप्त प्रबंधन नहीं है। कॉलेज को लेकर अलग-अलग न्यायालयों में भी वाद भी चल रहे हैं। उच्च शिक्षा सचिव डॉ. सिन्हा ने कहा कि हम कंट्रोलर की नियुक्ति से पहले सभी पक्षों को सुनते हुए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा व्यक्तिगत हित के बजाए एक गौरवशाली संस्था को बचाने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में रुसा और अन्य मदों से भी महाविद्यालय को बजट दिया, आगे भी कॉलेज के विकास के लिए मदद करेंगे। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि कॉलेज विधिक तौर पर सक्षम हाथों से संचालित हो। उच्च शिक्षा सचिव ने खुद किया स्कूल का दौरा बैठक में उच्च शिक्षा सचिव डॉ.रंजीत सिन्हा ने बताया कि वह दो अगस्त को महाविद्यालय का निरीक्षण करने गए थे। शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्राओं से उन्होंने कॉलेज की स्थिति जानी है। कॉलेज भवन जर्जर स्थिति में है। शिक्षकों को नियुक्ति, प्रोन्नति और अन्य लाभ नहीं मिल रहे हैं। एमेकेपी सोसाइटी का पंजीकरण खत्म होने की वजह से यह सभी समस्याएं सामने आई हैं। इसलिए इसका समाधान जरूरी है। सुनवाई में ये हुए शामिल अपर सचिव मनुज गोयल, ब्योमकेश दुबे, आलोक शाह, दीपक कुमार, एएस उनियाल, ममता ड्यूडी नैथानी, डॉ दीपक कुमार पाण्डेय, बिपिन चौबे, मयंक बिष्ट, डॉ. सरिता कुमार, एनएस भटनागर, राकेश ओबेरॉय, डॉ.इंदु सिंह, प्रवीण जैन, जितेन्द्र सिंह नेगी, कुलदीप नेगी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव अरविंद कुमार, कुलसचिव तकनीकी विश्वविद्यालय डॉ. राजेश उपाध्याय, कुलसचिव श्रीदेव सुमन दिनेश चंद्रा समेत अन्य मौजूद रहे।

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