
मुंबई,04 अगस्त। विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार को भारतीय रुपये ने जबरदस्त मजबूती दिखाई. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 32 पैसे की बढ़त के साथ 87.22 पर खुला, जो शुक्रवार के 87.54 के बंद स्तर से कहीं बेहतर है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की लगातार बिकवाली के बावजूद रुपये की यह छलांग निवेशकों के लिए राहत की खबर है.
डॉलर इंडेक्स में गिरावट और अन्य एशियाई मुद्राओं में मजबूती के चलते रुपये को सहारा मिला. डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर के करीब फिसल गया, जिससे रुपया और अधिक मजबूत होकर उभरा. पिछले सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपया 87.73 के निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन सोमवार को आई मजबूती ने गिरावट के इस सिलसिले को तोड़ दिया.
हाल के हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगातार पूंजी निकाली है. जुलाई में एफआईआई की कुल बिकवाली 47,666 करोड़ रुपये रही. इस बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बना, लेकिन अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को मजबूती मिली है.
डॉलर में कमजोरी की एक प्रमुख वजह अमेरिका में रोजगार दर में गिरावट और बेरोजगारी दर का 4.2 प्रतिशत तक बढ़ना है. इसके चलते सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित अन्य देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा से वैश्विक व्यापार प्रणाली में अस्थिरता और बढ़ गई है.
6 अगस्त को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले रुपये की यह मजबूती महत्वपूर्ण मानी जा रही है. व्यापारियों को उम्मीद है कि रुपया इस सप्ताह 87.00 से 87.80 के बीच कारोबार करेगा. आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप से रुपये में और स्थिरता आने की उम्मीद है.
डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से यह संकेत मिलता है कि भले ही वैश्विक चुनौतियां सामने हों, लेकिन भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी स्थिर और भरोसेमंद बनी हुई है. निवेशकों की नजरें अब आरबीआई के आगामी नीतिगत फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा.

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