डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया, 6 पैसे गिरकर 86.89 पर पहुंचा, महंगाई बढ़ने की आशंका

मुंबई,02 सितंबर। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 88.16 पर खुला. लगातार विदेशी फंड आउटफ्लो और डॉलर की मजबूत मांग ने घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला. सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड इन्ट्राडे लो 88.33 पर पहुंच गया था, लेकिन बंद होने से पहले 88.10 पर थमता दिखा.
विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव भारत की मुद्रा और शेयर बाजार की स्थिरता पर असर डाल रहे हैं. अमेरिका ने एशियाई निर्यातकों में सबसे अधिक टैरिफ लगाए हैं, जिससे भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है. पिछले तीन कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.4 अरब डॉलर निकाले, जिससे मुद्रा और इक्विटी बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली.
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 88.14 पर खुला और गिरकर 88.16 पर आ गया. डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.08 प्रतिशत बढ़कर 97.84 पर पहुंच गया. वहीं, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 68.45 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है.
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबरी ने कहा कि रुपया 88.50 के आसपास प्रतिरोध और 87.50 के आसपास समर्थन स्तर पर है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी टैरिफ मुद्दे अनसुलझे हैं, इसलिए जोखिम कमजोर रुपया होने की दिशा में अधिक है. लगातार विदेशी फंड आउटफ्लो या डॉलर की मजबूती से रुपया और कमजोर हो सकता है, जबकि किसी भी सुधार की संभावना सीमित रहेगी जब तक कि व्यापार संबंधों में स्पष्ट राहत नहीं मिलती.
डोमेस्टिक शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 207.45 अंक बढ़कर 80,571.94 पर और निफ्टी 60.80 अंक बढ़कर 24,685.85 पर खुला. सोमवार को एफआईआई ने 1,429.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी करते रहे.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ने अब अपने टैरिफ को शून्य करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन समय बहुत कम बचा है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ज्यादातर तेल और सैन्य उत्पाद रूस से खरीदता है, अमेरिका से बहुत कम, जबकि भारत अमेरिका के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार करता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक और व्यापारिक समुदाय इस समय मुद्रा की अस्थिरता और अमेरिकी टैरिफ नीति पर नजर बनाए हुए हैं. भारतीय रुपया और शेयर बाजार की दिशा आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों और विदेशी फंड प्रवाह पर निर्भर करेगी.

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