चम्पावत।उत्तराखंड के चंपावत जिले की मंजूबाला को उनके असाधारण शिक्षण कार्य के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2025 से नवाजा गया है। शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में मंजूबाला को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।
दुर्गम परिस्थितियों में शिक्षा का अलख
मंजूबाला वर्तमान में चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक स्थित च्यूरानी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। यह स्कूल सड़क मार्ग से लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां पहुंचना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। 2005 से इस स्कूल में सेवारत मंजूबाला ने अपने समर्पण और मेहनत से इस दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता
मंजूबाला केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने बच्चों को कुमाऊनी भाषा और संस्कृति से भी जोड़ा। इसके अलावा, उन्होंने नियमित कक्षाओं के साथ इवनिंग क्लासेस की शुरुआत की, जहां वे बच्चों को अतिरिक्त पढ़ाई के साथ-साथ जीवन कौशल भी सिखाती हैं।
राष्ट्रपति का संदेश और सम्मान
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार यह है कि उनके छात्र जीवन भर उन्हें याद रखें और समाज व देश के लिए योगदान दें।” मंजूबाला को इस अवसर पर प्रशस्ति पत्र, 50,000 रुपये नकद और एक रजत पदक से सम्मानित किया गया।
पिछले सम्मानों की झलक
मंजूबाला का यह पहला सम्मान नहीं है। इससे पहले उन्हें शैलेश मटियानी पुरस्कार, तीलू रौतेली पुरस्कार, आयरन लेडी पुरस्कार और मानव संसाधन विकास मंत्रालय का टीचर ऑफ द ईयर अवार्ड जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
स्थानीय प्रभाव और प्रेरणा
च्यूरानी प्राथमिक विद्यालय में वर्तमान में केवल छह छात्र हैं, फिर भी मंजूबाला हर दिन पैदल कई किलोमीटर चलकर बच्चों को पढ़ाने पहुंचती हैं। उनका कहना है, “मेरा लक्ष्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देना है।” उनके इस प्रयास ने न केवल स्थानीय समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है।

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