वाशिंगटन ,05 सितंबर । भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय अभूतपूर्व तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता ठप हो गई है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और पूर्व उप-विदेश सचिव कर्ट एम. कैंपबेल ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो अमेरिका एक अहम रणनीतिक साझेदार भारत को खो सकता है और इससे चीन को इनोवेशन के क्षेत्र में आगे निकलने का मौका मिल जाएगा।
‘फॉरेन अफेयर्सÓ पत्रिका में लिखे एक संयुक्त संपादकीय में सुलिवन और कैंपबेल ने कहा है कि भारत-अमेरिका साझेदारी को लंबे समय से द्विदलीय समर्थन प्राप्त रहा है और इस रिश्ते ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की आक्रामक नीतियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अमेरिकी सहयोगियों से अपील की कि वे भारत को यह समझाएं कि राष्ट्रपति ट्रंप की नाटकीय बयानबाजी अक्सर केवल सौदेबाजी की रणनीति का हिस्सा होती है, न कि कोई स्थायी नीति।
दोनों पूर्व अधिकारियों ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों — जिनमें भारत पर 50 प्रतिशत तक का आयात शुल्क, रूस से तेल खरीद को लेकर आपत्ति और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते समीकरण शामिल हैं — ने भारत-अमेरिका रिश्तों में तीखी गिरावट ला दी है। हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (स्ष्टह्र) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो अमेरिका, भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेल देगा।
संपादकीय में उन्होंने अमेरिका की नीति पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की तुलना पाकिस्तान से करना रणनीतिक रूप से गलत है। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका की चिंताएं सीमित हैं, जैसे आतंकवाद और परमाणु प्रसार, जबकि भारत के साथ बहुआयामी और दीर्घकालिक हित जुड़े हुए हैं।
पूर्व अधिकारियों ने ट्रंप की उस हालिया टिप्पणी पर भी आलोचना की जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम का श्रेय स्वयं को दिया था। भारत सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इसके बाद अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का व्हाइट हाउस में स्वागत किया गया और पाकिस्तान को व्यापार, क्रिप्टोकरेंसी और आर्थिक विकास में सहयोग का आश्वासन दिया गया। साथ ही, अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ तेल समझौता किया और उसी दौरान भारत पर 25 प्रतिशत तक का अतिरिक्त आयात शुल्क भी लगा दिया गया।
सुलिवन और कैंपबेल ने अमेरिका को सुझाव दिया कि भारत के साथ एक औपचारिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाया जाए, जिसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी मिले और जो पांच स्तंभों पर आधारित हो — सुरक्षा, समृद्धि, नवाचार, लोकतांत्रिक मूल्य और वैश्विक नेतृत्व।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भारत और अमेरिका को अगले दस वर्षों के लिए एक संयुक्त कार्य योजना तैयार करनी चाहिए, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में तकनीकी साझेदारी की जाए।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि दोनों देशों को एक साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक देश चीन जैसे सत्तावादी प्रतिद्वंद्वियों से इनोवेशन की दौड़ में पीछे न रह जाएं। इसके लिए प्रमोट और प्रोटेक्ट एजेंडे को लागू करने की सिफारिश की गई है, जिसमें निवेश, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा साझा करने के साथ-साथ निर्यात नियंत्रण और साइबर सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हों।
पूर्व अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका अपनी रणनीति नहीं बदलता है, तो वह केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार खो देगा, और इसका सीधा फायदा चीन को मिलेगा।
भारत को खो सकता है अमेरिका, चीन को मिलेगा इनोवेशन में बढ़तज्पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप को दी चेतावनी
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