- काठमांडू में पुलिस ने सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 11 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए।
- नेपाल की राजधानी में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने अधिकांश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को ब्लॉक करने के सरकारी फैसले के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
- प्रदर्शनकारियों ने कंटीले तारों को तोड़ दिया, पुलिस को पीछे धकेल दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारें छोड़ीं
- अधिकारियों का कहना है कि फेसबुक और यूट्यूब जैसी कंपनियां पंजीकरण कराने और निगरानी के लिए प्रस्तुत करने में विफल रहीं
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को एक भीषण घटना ने देश को हिलाकर रख दिया, जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुस गए और हिंसक झड़पों के बाद सेना ने फायरिंग की, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई। इस घटना में 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जबकि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
घटना का विवरण
प्रदर्शन की शुरुआत सुबह करीब 7 बजे जारि प्रांत के गुप्ता बाजार से हुई, जहां युवाओं, खासकर 18 से 30 साल के बीच के ‘जेन-जेड’ समूह ने सोशल मीडिया पर लगाए गए बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारी initially शांतिपूर्ण तरीके से संसद की ओर बढ़े, लेकिन सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़प हुई। भीड़ ने संसद के गेट तोड़कर अंदर प्रवेश कर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके जवाब में सेना ने गोलियां चलाईं, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए हालिया बैन को अपनी आजादी पर हमला करार दिया। सरकार का दावा है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने स्थानीय कानूनों के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, लेकिन युवाओं का कहना है कि यह उनके अभिव्यक्ति के अधिकार को दबाने की साजिश है।
सेना और सरकार की प्रतिक्रिया
सेना ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और सुरक्षा कर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद गोलीबारी आवश्यक हो गई। गृह मंत्रालय ने इस घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आपात बैठक बुलाई और स्थिति पर काबू पाने के लिए सेना को सड़कों पर उतारा। कर्फ्यू के साथ-साथ ‘देखते ही गोली मारो’ के आदेश भी जारी किए गए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
जनजीवन प्रभावित
काठमांडू समेत कई शहरों में बाजार बंद हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय निवासियों ने अपने घरों में दुबककर स्थिति का इंतजार करना शुरू कर दिया है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सा व्यवस्था पर भारी दबाव है। सोशल मीडिया पर बैन के बावजूद, कुछ उपयोगकर्ताओं ने वीपीएन के जरिए घटना की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जो देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस हिंसक घटना पर संयुक्त राष्ट्र और भारत-चीन जैसे पड़ोसी देशों ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि भारत ने अपनी सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई जा रही है, वहीं अन्य इसे अराजकता करार दे रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
नेपाल में यह घटना न केवल देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि युवाओं के गुस्से और असंतोष को भी उजागर करती है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव कम करने के लिए तत्काल वार्ता की जरूरत है, अन्यथा स्थिति और गंभीर हो सकती है। मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है, लेकिन सड़कों पर शांति बहाल करना अभी चुनौती बना हुआ है।

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