देहरादून। उत्तराखंड में नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘ड्रग-फ्री देवभूमि’ अभियान की घोषणाओं के बीच एक नया विवाद सामने आया है।उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि एक तरफ मुख्यमंत्री नशा-मुक्त उत्तराखंड की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ BJP के कुछ नेता कथित तौर पर रेव पार्टियों में शामिल पाए जा रहे हैं। इन आरोपों ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है।
डॉ. प्रतिमा सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “BJP सरकार युवाओं को नशे की ओर धकेलने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री धामी ‘नो टू ड्रग्स’ का नारा देते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेता रेव पार्टियों में शामिल हो रहे हैं। सत्ता की हनक के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।” उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल ही में एक रेव पार्टी की घटना में पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनके अनुसार, नार्कोटिक्स विभाग की टीम मौके पर पहुँची थी, लेकिन जैसे ही मामला सत्ताधारी दल से जुड़ा होने का पता चला, वे बिना कार्रवाई के वापस लौट गए।
डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि पुलिस ने अब तक घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज या वहाँ मौजूद लोगों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की। उन्होंने इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए कहा, “यह उत्तराखंड की जनता के साथ विश्वासघात है। अगर सरकार नशे के खिलाफ गंभीर है, तो पहले अपने नेताओं पर कार्रवाई करे।”
मुख्यमंत्री के दावे और वास्तविकता में अंतर ?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई मौकों पर उत्तराखंड को 2025 तक नशा-मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने ‘मिशन ड्रग्स फ्री देवभूमि’ जैसे अभियानों की शुरुआत की और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की बात कही। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि ये दावे केवल दिखावटी हैं और धरातल पर सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं का व्यवहार इसके विपरीत है।
विपक्ष की माँग: निष्पक्ष जाँच और पारदर्शिता
डॉ. प्रतिमा सिंह ने माँग की है कि रेव पार्टी की घटना की निष्पक्ष जाँच हो और सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा, “युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए पहले उन लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा जो इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।”
सरकार की चुप्पी, जनता में आक्रोश
कांग्रेस इस मामले में अभी तक BJP सरकार या पुलिस प्रशासन की ओर से दिए बयान को संतोषजनक नहीं मानती है। सूत्रों के अनुसार, नार्कोटिक्स विभाग की चुप्पी और सीसीटीवी फुटेज के गायब होने से जनता में असंतोष बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है, और लोग सरकार से जवाब माँग रहे हैं।
आगे क्या?
यह विवाद उत्तराखंड की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इस मामले को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है, जबकि BJP के लिए यह एक चुनौती है कि वह अपनी छवि को कैसे बचाए। क्या सरकार इस मामले में पारदर्शी जाँच करवाएगी, या यह आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।

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