विकासनगर। विकासनगर तहसील क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। हरिपुर बायपास रोड स्थित एक बड़े आम के बगीचे में दर्जनों फलदार, हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई बिना अनुमति और खुलेआम जारी है, लेकिन प्रशासन और विभागीय अधिकारी मानो आंख मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भूमि को आवासीय प्लॉटों में बदलने की साजिश के तहत यह कटाई हो रही है। पहले ही सैकड़ों पेड़ उखाड़े जा चुके हैं और शेष बचे बगीचे पर भी संकट मंडरा रहा है। सरकारी आदेशों में स्पष्ट है कि बिना वैध अनुमति एक भी पेड़ नहीं काटा जा सकता, लेकिन यहां खुलेआम पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
वन एवं उद्यान विभाग के अधिकारी स्टाफ की कमी और निगरानी में दिक्कतों का हवाला देते हैं, मगर सवाल यह उठता है कि आखिर कानून का डर किसके लिए है? जनता का मानना है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत का नतीजा है।
सूत्रों का कहना है कि जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, तभी संबंधित स्थल का औपचारिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद उद्यान विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उद्यान सचल दल केंद्र, विकासनगर की ओर से तहसीलदार विकासनगर को एक पत्र भेजा गया। इस पत्र में विशेष रूप से संबंधित भूमि स्वामी का खाता संख्या और पूरा पता उपलब्ध कराने का अनुरोध है, ताकि आगे वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में उत्तराखंड के कई हिस्सों में आम के बगीचों को निशाना बनाया गया। हाल ही में विकासनगर बाजार क्षेत्र में 18 आम के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया था, जिस पर विभाग ने जांच शुरू करने का दावा किया, लेकिन अब तक नतीजा शून्य है। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी स्तर पर बार-बार जारी आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई ठंडी पड़ी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल पेड़ काटने का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की जैव विविधता और जलवायु संतुलन पर सीधा हमला है। “अगर अभी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी,” विशेषज्ञ चेताते हैं।

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