देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा, 2025 में नकल के गंभीर आरोपों के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मामले की जांच अब सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी.एस. वर्मा, पूर्व न्यायाधीश उत्तराखंड उच्च न्यायालय की निगरानी में होगी।
राज्य सरकार द्वारा 24 सितंबर को गठित पांच सदस्यीय विशेष अन्वेषण दल (SIT) का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) देहरादून, जया बलूनी करेंगी। इस टीम को पूरे प्रदेश में फैले नकल के जाल को उजागर करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है।
गृह सचिव शैलेश बगौली द्वारा जारी आदेश के अनुसार, न्यायमूर्ति वर्मा SIT की कार्यवाही की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न हो। उन्हें प्रदेश के सभी जिलों में जाकर शिकायतों का संज्ञान लेने और SIT को आवश्यक मार्गदर्शन देने का अधिकार भी प्रदान किया गया है।
यह निर्णय UKSSSC द्वारा 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में हुई अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद लिया गया है। बेरोजगार संघ का दावा था कि परीक्षा शुरू होने के मात्र 35 मिनट बाद ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था। इससे पूर्व, परीक्षा से एक दिन पहले पुलिस ने कथित नकल माफिया हाकम सिंह और उसके एक सहयोगी को अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का प्रलोभन देकर ठगने के आरोप में गिरफ्तार भी किया था।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि न्यायिक निगरानी में हो रही यह जांच मामले की जड़ तक पहुंचेगी।

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