आंदोलन के मुद्दों को ‘आजादी’ की ओर मोड़ने की कोशिश

देहरादून। बेरोजगार संघ का आंदोलन अपने शबाब पर है, लेकिन अब इसे हाईजैक करने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। इस बार आंदोलन के मंच से एक नेत्री ‘छीन के लेंगे आजादी’ के नारे लगाती नजर आईं। उनके सुर में सुर मिलाते हुए युवाओं ने भी ताली बजाकर नारेबाजी में साथ दिया।

यह पहली बार है जब जेएनयू और अन्य आंदोलनों की तर्ज पर ‘आजादी…आजादी’ के नारे देहरादून में गूंजे हैं। इससे बेरोजगारों के असली मुद्दों पर राजनीतिक परत चढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है।

हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में एक युवती को रात में माइक संभालकर ‘लड़कर लेंगे आजादी’ जैसे नारे लगाते देखा गया। उसके चारों ओर खड़े युवा भी जोश से नारे लगाते और ताली बजाते दिख रहे हैं।

गौरतलब है कि बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल, बॉबी पंवार समेत हजारों युवा पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच सहित अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलित हैं। दून के अलावा अन्य शहरों और गांवों में भी यह आंदोलन फैल चुका है।

राज्य गठन के बाद पहली बार राजधानी देहरादून में गूंजे इन नारों ने सरकार और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। खुफिया विभाग यह जांच पड़ताल कर रहा है कि आखिर आंदोलन में बाहर से आए लोग किस मकसद से शामिल हो रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस विचारधारा से जुड़े संगठनों और नेताओं की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब तक बेरोजगारों का आंदोलन मुद्दा आधारित और शांतिपूर्ण था, लेकिन बाहरी तत्वों की घुसपैठ से इसका फोकस भटक सकता है।

बॉबी पंवार से पूछताछ और हरिद्वार छात्र संगठन के सचिव शैलेश बगौली से मुलाकात के बाद आंदोलन में तेजी तो आई, लेकिन यह कदम उल्टा पड़ता दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि ‘आजादी’ के नारों का शोर बढ़ा तो बेरोजगार युवाओं के असली मुद्दे पीछे छूट जाएंगे और आंदोलन को अन्य शक्तियां हाईजैक कर सकती हैं।

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