फील्डिंग, फंडिंग, और सी एम की घेराबंदी

देहरादून। यूकेएसएसएससी परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर युवाओं का विरोध-प्रदर्शन अब बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, हल्द्वानी और अन्य जिलों में हजारों युवा लगातार छठे दिन सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जता रहे हैं। बेरोजगार अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि भर्ती परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए।

रविवार को पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद से ही युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। राजधानी में जगह-जगह जाम, नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी साफ कह रहे हैं कि जब तक सीबीआई जांच का ऐलान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। युवाओं का तर्क है कि प्रदेश में एसआईटी जांच से पहले भी कई मामले दब चुके हैं, इसलिए उन्हें किसी स्थानीय जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है।

वहीं धामी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं। सरकार का दावा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि “सरकार युवाओं के साथ है और परीक्षा की पवित्रता के साथ खिलवाड़ करने वालों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।” लेकिन युवाओं का मानना है कि एसआईटी जांच सिर्फ समय काटने जैसा कदम है। उनका कहना है कि असली सच केवल सीबीआई जांच से ही सामने आ सकता है।

इस बीच, हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी खुलकर युवाओं के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओं को भरोसा दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। रावत ने साफ कहा कि जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए ताकि हर शक दूर हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
दिलचस्प यह है कि अपने कार्यकाल के दौरान एनएच भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई को न सौंपने वाले त्रिवेंद्र अब इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा भी गर्म है कि क्या त्रिवेंद्र युवाओं के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं या फिर युवाओं की भावनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया है।

युवाओं के आंदोलन में अब राजनीतिक रंग भी चढ़ने लगा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता भी युवाओं के बीच जाकर समर्थन जता चुके हैं। वहीं, त्रिवेंद्र सिंह रावत जैसे वरिष्ठ भाजपा नेता का समर्थन मिलना इस आंदोलन को और मजबूती दे सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

बेरोजगारों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक और धांधलियों ने उनकी जिंदगी और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। एक अभ्यर्थी ने कहा – “हमने सालों तैयारी की, लेकिन सरकार और तंत्र की लापरवाही से सबकुछ बर्बाद हो रहा है। अब सिर्फ सीबीआई जांच ही न्याय दिला सकती है।”

टी एस आर की बाईट

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