देहरादून, 28 सितम्बर — उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और ₹2 लाख रुपये का जुर्माना लगने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इसे अभूतपूर्व और लोकतंत्र के लिए चिंताजनक करार देते हुए प्रदेश सरकार और आयोग से सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की है।
दसौनी ने कहा कि यह जुर्माना जनता के टैक्स से नहीं, बल्कि आयोग के जिम्मेदार अधिकारियों की तनख्वाह से वसूला जाना चाहिए। उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब किसी राज्य के निर्वाचन आयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकार का दंड लगाया है, जो आयोग की लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करता है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी—कि आयोग का आदेश कानून के विपरीत था—को लोकतंत्र की जड़ों को हिलाने वाला बताया। उन्होंने पंचायती राज सचिव से भी स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की और पूछा कि क्या वे इस असंवैधानिक आदेश पर चुप रहेंगे या जनता के सामने सच्चाई रखेंगे।
दसौनी ने मांग की कि आयोग में बैठे सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि लोकतंत्र पर जनता का विश्वास बहाल हो सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आयोग किसके दबाव में काम कर रहा है और चुनावी प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों का जिम्मेदार कौन है।
कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश सरकार और निर्वाचन आयोग से इस पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

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