देहरादून। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षा में बैठने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने वाला एक युवक आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। आरोपी सुरेन्द्र कुमार ने एक ही परीक्षा के लिए तीन अलग-अलग केन्द्रों—टिहरी, हरिद्वार और देहरादून—से आवेदन डालकर तमाम सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की, मगर उसकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल सकी।
UKSSSC को आवेदन डाटा की जांच के दौरान सुरेन्द्र के संदिग्ध होने का पता चला, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर गुप्त जांच शुरू हुई। पुलिस ने पाया कि आरोपी ने केवल मोबाइल नंबर ही नहीं बदले, बल्कि असली उम्र छुपाकर नए-नए प्रमाण पत्र भी तैयार किए। असल में सुरेन्द्र की जन्मतिथि 1 अप्रैल 1988 है, लेकिन सरकारी नौकरी पाने की चाहत में उसने बार-बार अलग पेपर देकर जन्मतिथि बदलवा दी और 1 जनवरी 1995 बना ली।
गाजियाबाद का रहने वाला यह ‘मुन्ना भाई’ वर्तमान में पिलखुआ, हापुड़ में अपने माता-पिता और पत्नी के साथ रहता है और एक निजी स्कूल में टीचर की नौकरी करता है। पुलिस पूछताछ में उसने मान लिया कि बढ़ती उम्र और कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते फर्जी दस्तावेज बना भर्ती में हिस्सा लेने की योजना बनाई थी।
अब पुलिस ने सुरेन्द्र को धर दबोचकर उसके खिलाफ थाना रायपुर में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी से आगे की पूछताछ जारी है और पुलिस यह भी खंगाल रही है कि कहीं उसकी मदद करने वाला कोई रैकेट तो नहीं है।
इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं—कहीं और ‘मुन्ना भाइयों’ की घुसपैठ तो नहीं?

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