विरासत महोत्सव में ऐतिहासिक कार रैली का आयोजन

महारानी राज्यलक्ष्मी हमारी चौपाल शाह ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

देहरादून। देहरादून में चल रहे ‘विरासत आर्ट एंड हैरिटेज महोत्सव’ का दूसरा दिन आज, रविवार को, ऐतिहासिक विंटेज कारों और दुपहिया वाहनों की एक शानदार रैली के नाम रहा। ओएनजीसी के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टेडियम से शुरू हुई इस अनोखी रैली में सात दशक से भी पुराने वाहन आकर्षक साज-सज्जा के साथ दून की सड़कों पर उतरे और दर्शकों का मन मोह लिया।
टिहरी संसदीय क्षेत्र की सांसद महारानी राज्यलक्ष्मी शाह ने विरासत महोत्सव पंडाल से इस अद्भुत कार रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर रीच (REACH) संस्था की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी भी उपस्थित रहीं।

इतिहास के पन्नों से निकलीं ये ‘अदाकार’ गाड़ियाँ
विरासत महोत्सव, जो कि ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने का उत्सव है, ने आज विंटेज वाहनों की रैली के माध्यम से इस रिश्ते को और मजबूत किया। रैली में 60 दुपहिया और 30 पुरानी कारों ने भाग लिया, जिन्होंने अपने अद्भुत और अनमोल रूप से सबका ध्यान खींचा।
रैली में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहीं कुछ विशिष्ट कारें:
प्लाई माउथ 1954 मॉडल: इंग्लैंड में सन 1942 में निर्मित हुई यह कार विशेष रूप से सराही गई। यह कार पहले दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर ए एम झा के पास थी और वर्तमान में यह हिमालय ड्रग कंपनी के चेयरमैन डॉ. एस फारूक के स्वामित्व में है।
फोर्ड यूएसए 1928 मॉडल: इंग्लैंड में बनी 350 सीसी पेट्रोल की यह कार भी आकर्षण का केंद्र रही। यह भी वर्तमान में डॉ. एस. फारूक के पास है, जबकि इसके पहले ऑनर नई दिल्ली के एसीपी गुरूदत्त भारद्वाज थे।

यूएसजे 8577 जीप 1948 मॉडल: सगीर अहमद के स्वामित्व वाली यह पुरानी जीप भी विशेष रूप से प्रदर्शित की गई।
इसके अलावा, रैली में एक आज़ादी से पहले की साइकिल भी कौतूहल का विषय बनी, जिसका एक पहिया बड़ा और पिछला पहिया छोटा था। प्राइवेट वैन 1972 मॉडल (यूपी 07 के-9034) ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया।
दुपहिया वाहनों का भी रहा जलवा
दुपहिया वाहनों की श्रृंखला में लैंब्रेटा, वेस्पा, विजय सुपर, लूना, यजदी, बुलेट मोटरसाइकिलें, और बजाज के कई ओल्ड मॉडल वाले स्कूटर फर्राटे भरते नज़र आए। सड़कों के किनारे सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ा, जिन्होंने इन ऐतिहासिक वाहनों के साथ जमकर सेल्फी और फोटोग्राफ लिए।
इन बुज़ुर्ग वाहनों ने साबित कर दिया कि विरासत केवल पुरानी इमारतों या लोक कलाओं में ही नहीं, बल्कि सड़कों की शान रहे इन अद्भुत ‘मशीनी धरोहरों’ में भी बसी हुई है। विरासत महोत्सव में अब आने वाले दिनों में और भी सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

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