आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों का धरना शुरू, मांगों को लेकर उग्र हुआ आंदोलन

दीनदयाल उपाध्याय पार्क में ‘करो या मरो’ के संकल्प के साथ बैठीं कार्यकर्त्रियाँ

देहरादून। उत्त्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की ओर से वर्षों से लंबित मांगों को लेकर चला संघर्ष अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर गया है। लंबे समय से सरकार द्वारा की जा रही अनदेखी, अधूरी आश्वासन व समितियों के सहारे टालते जा रहे समाधान के विरोध में प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां मंगलवार 14 नवंबर 2025 से देहरादून स्थित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई हैं।

सुबह से ही पार्क में कार्यकर्त्रियों का भारी जमावड़ा रहा। सभी कार्यक्षेत्रों से आई सैकड़ों आंगनबाड़ी बहनों ने अपने संगठन के बैनर तले जोरदार नारेबाजी की और सरकार को चेताया कि अब आंदोलन पीछे हटने वाला नहीं है। “करो या मरो” के संकल्प के साथ शुरू हुए इस धरने ने राजधानी के माहौल में नई उथल-पुथल पैदा कर दी है।

प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां लगातार अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार तथा विभाग के सामने रखती आ रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन और कागजी समितियां बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद न तो वार्ता के लिए समय मिला और न ही विभागीय मंत्री व प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल की गई।

संघ का आरोप है कि कार्यभार लगातार बढ़ता जा रहा है, अन्य विभागों के कार्य भी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों पर थोपा जा रहा है, जिससे उनका शोषण चरम पर है। उन्होंने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट तक यह मान चुका है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को उनके कार्य के एवज में कम से कम 24,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलना चाहिए, लेकिन उत्तराखंड में आज भी वे उपेक्षा का सामना कर रही हैं।

संघ ने अपनी प्रेस वार्ता में बताया था कि 10 तारीख तक मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिनिधिमंडल से वार्ता किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन 12 तारीख बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से संगठन से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं साधा गया। इसी कारण यह आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।

कार्यकर्त्रियों ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करती, तब तक यह धरना और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो प्रदेशभर में आंगनबाड़ी सेवाएं बाधित होंगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

दीनदयाल उपाध्याय पार्क में उमड़ी भीड़ और कार्यकर्त्रियों का जोश इस बात का संकेत दे रहा है कि यह संघर्ष अब लंबा चलेगा और जल्द ही राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।

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