‘शिक्षित बेटियां सशक्त समाज’ संकल्प चरितार्थ

डीएम बंसल का ‘एकल स्ट्रोक’, प्रियंका कुकरेती को नौकरी और एमटेक में दाखिला

देहरादून। मुख्यमंत्री के ‘शिक्षित बेटियां सशक्त समाज’ के संकल्प को देहरादून जिला प्रशासन पूरी तत्परता से चरितार्थ कर रहा है। खराब आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रही, बिन पिता की होनहार इंजीनियर बेटी प्रियंका कुकरेती के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक ‘एकल प्रशासनिक स्ट्रोक’ के माध्यम से उन्हें न केवल रोजगार दिलाया, बल्कि उनकी उच्च शिक्षा की राह भी खोल दी है।

चन्द्रबनी निवासी प्रियंका कुकरेती और उनकी माता ने गत माह अक्टूबर में जिलाधिकारी सविन बंसल से मुलाकात कर परिवार की बदहाल आर्थिक स्थिति से अवगत कराया था। प्रियंका ने बताया था कि उनके पिता की मृत्यु वर्ष 2021 में हो चुकी है और भाई दिव्यांग है। उनकी योग्यता के बावजूद खराब आर्थिकी के कारण उनका भविष्य अनिश्चित था।
तत्काल संज्ञान लेते हुए, जिला प्रशासन ने शुरुआती दौर में प्रियंका को रायफल फंड से ₹25,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। इसके बाद, जिलाधिकारी ने उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप एक प्रतिष्ठित निजी शिक्षण संस्थान में ‘लैब ऑफिसर’ के पद पर उनकी नियुक्ति सुनिश्चित करवाई।

निजी संस्थान में नौकरी मिलने के बाद प्रियंका अपनी माता के साथ शनिवार को जिला प्रशासन और जिलाधिकारी का धन्यवाद करने कलेक्ट्रेट पहुंचीं। जिलाधिकारी ने प्रियंका से पूछा कि क्या वह नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, जिस पर प्रियंका ने तुरंत हामी भरी।
जिलाधिकारी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को एमटेक (M.Tech) या स्नात्कोत्तर कम्प्यूटर मास्टर (PG Computer Master) कोर्स में अगले सत्र में इसी संस्थान में दाखिला दिलाने के निर्देश दिए।

डीएम का वचन: “आप अपनी शिक्षा जारी रखें, जिला प्रशासन हरसंभव मदद करेगा। जिला प्रशासन प्रतिभाशाली बेटियों के कदम नहीं रुकने देगा।”

डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रियंका की उच्च शिक्षा में होने वाले फीस और किताबों का पूरा खर्च जिला प्रशासन और संबंधित निजी संस्थान मिलकर वहन करेंगे।

जिला प्रशासन लगातार ऐसी होनहार और आर्थिक रूप से असहाय बालिकाओं को शिक्षित और सेवायोजित करने का प्रयास कर रहा है। ऐसे प्रकरण सामने आने पर ‘नंदा-सुनंदा योजना’ के तहत बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा रहा है। अब तक लगभग 90 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए ₹32 लाख की धनराशि खर्च की जा चुकी है। यह पहल मातृशक्ति को सशक्त बनाने और शिक्षित समाज के निर्माण की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है।

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