कहा- उत्तराखंड आंदोलन का एक स्तंभ ढह गया
हरिद्वार/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति के कद्दावर नेता और ‘फील्ड मार्शल’ के नाम से मशहूर दिवाकर भट्ट की अंतिम यात्रा में आज जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस भावुक क्षण में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने हरिद्वार पहुंचकर दिवंगत नेता को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
आंदोलन के पुरोधा को नमन
दोनों वरिष्ठ नेताओं ने रास्ते में ही दिवाकर भट्ट के पार्थिव शरीर को ले जा रहे वाहन को रुकवाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। शोक व्यक्त करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि दिवाकर भट्ट का जाना उत्तराखंड राज्य आंदोलन के एक युग का अंत है। उन्होंने कहा, “स्वर्गीय भट्ट ने उत्तराखंड आंदोलन को जो धार दी थी और राज्य निर्माण में उनका जो योगदान रहा है, वह अविस्मरणीय है। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना मुश्किल होगा।”

खड़खड़ी घाट पर दो घंटे किया इंतजार
इससे पूर्व, हरीश रावत और धीरेंद्र प्रताप अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सीधे हरिद्वार स्थित खड़खड़ी शमशान घाट पहुंचे थे। वहां उन्होंने स्थानीय विधायक मदन कौशिक और पूर्व विधायक प्रीतम पंवार व अन्य नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक शव यात्रा का इंतजार किया। इस दौरान सभी नेताओं ने आपस में चर्चा करते हुए ‘फील्ड मार्शल’ के संघर्षों और राज्य के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
सड़क पर रोककर दी विदाई
हरिद्वार में अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ उमड़ने के कारण शव वाहन को घाट तक पहुंचने में अत्यधिक विलंब हो रहा था। दो घंटे के लंबे इंतजार के बाद भी जब शव यात्रा खड़खड़ी घाट नहीं पहुंच सकी, तो हरीश रावत और धीरेंद्र प्रताप लाल तारा पुल की ओर रवाना हो गए।

रास्ते में ही जब उनकी नजर दिवाकर भट्ट के शव वाहन पर पड़ी, तो उन्होंने अपने काफिले को रुकवाया। सड़क पर ही उन्होंने दिवंगत जननेता के वाहन के पास जाकर फूल चढ़ाए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दौरान वहां मौजूद सैकड़ों लोगों ने भी अपने नेता को श्रद्धांजलि दी।

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