जिला अस्पताल में 1600+ रोगी, युवा सबसे ज्यादा प्रभावित!
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एड्स (HIV) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय बन गया है। जिला अस्पताल कोरोनेशन के एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) सेंटर में रजिस्टर्ड 1622 से ज्यादा सक्रिय मामले इसकी पुष्टि करते हैं। खासकर युवा पीढ़ी इस संक्रमण की चपेट में आ रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2006 से मार्च 2025 तक अस्पताल में कुल 6,800 मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन सक्रिय मरीजों की संख्या में कमी के बावजूद नई रजिस्ट्रेशन चिंताजनक हैं।
जिला अस्पताल के ART सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. वैभव कुमार ने बताया कि 2024-25 वित्तीय वर्ष में 87 नए मामले रजिस्टर्ड हुए, जिनमें से 47 देहरादून जिले के हैं। 2025-26 में अब तक 14 नए केस आ चुके हैं, जिसमें 8 स्थानीय हैं। डॉ. कुमार ने कहा, “यह ट्रेंड अलार्मिंग है। ज्यादातर मरीज 18-35 साल के युवा हैं, जिनमें असुरक्षित यौन संबंध, ड्रग्स का इंजेक्शन शेयरिंग और मां से बच्चे में संक्रमण मुख्य कारण हैं।” अस्पताल में 1,625 सक्रिय मरीजों में से 8 बच्चे मां से संक्रमित हैं। 2023 में 639 मामले थे, जो 2024 में घटकर 561 और 2025 के पहले तीन महीनों में 117 रह गए, लेकिन नई रजिस्ट्रेशन में वृद्धि जारी है।
यह समस्या सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं। राज्य स्तर पर हर दिन औसतन तीन लोग HIV पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। हाल ही में हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में जनवरी 2024 से मार्च 2025 तक 477 नए मामले सामने आए, जो ड्रग अब्यूज से जुड़े हैं। उत्तराखंड स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (USACS) के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल सबसे प्रभावित जिले हैं। 2022 में अप्रैल से अक्टूबर तक 739 मामले दर्ज हुए थे, जो औसतन 105 प्रति माह थे। वर्तमान में राज्य के 219 स्वास्थ्य केंद्रों पर 5,580 मरीज ART ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी, माइग्रेशन (देहरादून में बाहरी मजदूरों की आमद) और स्टिग्मा मुख्य वजहें हैं। USACS की समाजसेवी रेखा ने कहा, “ट्रांसजेंडर और एलजीबीटी समुदाय में जागरूकता कम है। फ्री टेस्टिंग और काउंसलिंग बढ़ानी होगी।” NACO टोल-फ्री हेल्पलाइन 1097 पर कॉल कर सलाह ली जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने कैंपेन शुरू किया है, जिसमें कंडोम वितरण, फ्री टेस्टिंग और ART दवाओं पर जोर है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “एचआईवी रोकथाम के लिए बजट बढ़ाया गया है। युवाओं को जागरूक करेंगे।” लेकिन विपक्ष ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। क्या यह बढ़ोतरी रोकी जा सकेगी? देहरादून के युवा सावधान रहें – सुरक्षित रहें, जागरूक रहें!

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