देहरादून। अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर रहे नर्सिंग बेरोजगारों और पुलिस प्रशासन के बीच सोमवार को उस समय तीखी झड़प हो गई, जब एक महिला पुलिसकर्मी पर एक प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर थप्पड़ मारने का आरोप लगा। इस हाथापाई और हंगामे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को ‘वर्षवार’ (Year-wise) किए जाने की मांग को लेकर एकजुट हुए इन अभ्यर्थियों के मार्च को पुलिस ने दिलाराम चौक से आगे सालावाला-हाथीबड़कला पुल के पास बैरिकेड लगाकर रोक दिया था।
सर्जरी के बावजूद जबरन बैठाने की कोशिश में हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस बैरिकेड पर तनाव बढ़ गया। हरिद्वार की एक नर्सिंग अभ्यर्थी, सपना राठौर, ने बताया कि एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठने को कहा। सपना ने दावा किया कि उन्होंने पुलिसकर्मी को अपनी हालिया सर्जरी के बारे में बताया और कहा कि वह खुद बैठ जाएँगी, लेकिन इसी बात पर बहस बढ़ गई और महिला कांस्टेबल ने उन्हें थप्पड़ मार दिया।
इस घटना के बाद नर्सिंग बेरोजगार और अधिक भड़क उठे और उन्होंने पुलिस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। हाथापाई के दौरान कई अभ्यर्थी सड़क पर गिर गए, जिससे उन्हें मामूली चोटें भी आईं।

घसीटने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप
नर्सिंग मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने पुलिस के इस बर्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वहीं, एक अन्य अभ्यर्थी मधु उनियाल ने पुलिस पर कई साथियों को नाखून मारने, घसीटने और एक पुलिसकर्मी पर “देख लेने” की धमकी देने तथा अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया।
करीब डेढ़ घंटे तक चले इस हंगामे के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें एकता विहार स्थित धरना स्थल पर ले जाया गया। इस दौरान उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल भी समर्थन देने पहुँचे और घटना की निंदा की।
इस मौके पर मंच के संरक्षक विकास पुंडीर, उपाध्यक्ष सरिता जोशी, सचिव राजेंद्र कुकरेती, सह सचिव अनिल रमोला, मीडिया प्रभारी प्रवेश रावत, स्तुति सती, पपेंद्र, आकाश, अजीत भंडारी, श्वेता डोभाल आदि मौजूद रहे।

नर्सिंग अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
नर्सिंग अभ्यर्थियों ने अपनी प्रमुख माँगें दोहराई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- जारी भर्ती विज्ञप्ति को तुरंत निरस्त किया जाए और भर्ती पोर्टल बंद किया जाए।
- भर्ती प्रक्रिया को पूर्व की भांति वर्षवार आयोजित किया जाए ताकि वरिष्ठता और निष्पक्षता बनी रहे।
- राज्य में 2,500 से अधिक नए पदों पर आईपीएचएस मानकों के अनुसार नई विज्ञप्ति जारी की जाए।
- उत्तराखंड के मूल निवासी अभ्यर्थियों को भर्ती में प्राथमिकता दी जाए और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाए।
- आयु सीमा पार कर चुके योग्य अभ्यर्थियों को विशेष आयु छूट प्रदान की जाए।

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