देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल की अभिनव पहल से 267 बच्चों का रेस्क्यू, 154 शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े

देहरादून। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति, बालश्रम और कूड़ा बीनने से रेस्क्यू किए गए 267 बच्चों को आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (आईसीसी) के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा में लौटाने की एक नई दिशा दी है। इस अभियान के तहत अब तक 154 बच्चों का विभिन्न सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है, जबकि शनिवार को 27 नए बच्चों को प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर प्रवेश दिलाया गया। यह पहल घनघोर अंधकार से शिक्षा के उजाले की ओर एक सार्थक कदम है, जो बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेल गतिविधियों और मानसिक सशक्तिकरण के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ती है।

दिसंबर 2024 से अब तक जिला प्रशासन ने कुल 267 बच्चों को रेस्क्यू किया है, जिनमें से 83 भिक्षावृत्ति, 117 कूड़ा बीनने और 67 बालश्रम से जुड़े थे। इन्हें साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित आधुनिक आईसीसी में रखा गया, जहां उन्हें शिक्षा, आहार, चिकित्सा और मानसिक सहायता उपलब्ध है। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में बच्चों की पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था के साथ-साथ कंप्यूटर लैब, संगीत कक्ष, योग और खेल के मैदान जैसी सुविधाएं दी गई हैं। बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब की व्यवस्था भी की गई है, और जिलाधिकारी स्वयं नियमित रूप से मॉनिटरिंग करते रहे। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को प्रीमियम सुविधाएं दी जा रही हैं, और भिक्षावृत्ति निवारण एवं आईसीसी संचालन के लिए विस्तृत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की गई है।

शनिवार को साधुराम इंटर कॉलेज में आयोजित एक भावुक कार्यक्रम में विधायक खजान दास और जिलाधिकारी सविन बंसल ने 27 रेस्क्यू बच्चों को स्टेशनरी और स्कूल यूनिफॉर्म प्रदान कर विद्यालयों में प्रवेश दिलाया। इनमें से 10 बच्चों का दाखिला प्राथमिक विद्यालय परेड ग्राउंड में और 17 का साधुराम इंटर कॉलेज में कराया गया। पहले ही 127 बच्चों का दाखिला कर दिया जा चुका है। विधायक ने जिला प्रशासन की इस “मानवीय संकल्प” की सराहना करते हुए कहा कि अंतिम छोर से मुख्यधारा तक बच्चों को लाने का यह प्रयास प्रशंसनीय है। उन्होंने बच्चों को निरंतर पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा दी और आईसीसी की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर वार्षिक पत्रिका का विमोचन भी किया। छात्र इंद्रजीत को अनुशासन और यूनिफॉर्म, छात्रा रोशनी को नियमित उपस्थिति और पढ़ाई, और अनुराधा को करिकुलम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतीक चिह्न से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान रेस्क्यू बच्चों के अभिभावकों ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया, जो उनके बच्चों को नया जीवन दे रहा है। जिलाधिकारी बंसल ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि “परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई पूरी कराना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है।” उन्होंने बताया कि 154 बच्चों का दाखिला हो चुका है, लेकिन पूर्ण सेचुरेशन अभी बाकी है। यह अभियान रुकना नहीं चाहिए, और एनजीओ, शिक्षकों व अधिकारियों को ऑटोमैटिक मोड में काम जारी रखने के निर्देश दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी शाह ने इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि प्रशासन हमेशा सहयोग के लिए तत्पर है।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, कमांडेट होमगार्ड निर्मल जोशी, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम कुमकुम जोशी, मुख्य शिक्षा अधिकारी वीके ढ़ौडियाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट और असारा ट्रस्ट के अमित बलूनी जैसे अधिकारी उपस्थित थे। यह अभियान न केवल बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बना रहा है, बल्कि देहरादून की सड़कों को भिक्षावृत्ति और बालश्रम से मुक्त भी कर रहा है।

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