उत्तराखंड शिक्षा अधिकारी को 58 वर्ष की आयु में पीएचडी: लिजी ट्रस ने प्रदान की उपाधि

सेवानिवृत्ति के करीब पीएचडी हासिल कर प्रेरणा बने उत्तराखंड के डॉ. भगवती प्रसाद मैन्दोली

देहरादून। उत्तराखंड राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग को गर्व है कि राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा उत्तराखंड के स्टॉफ ऑफिसर भगवती प्रसाद मैन्दोली को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू), फगवाड़ा, पंजाब के 12वें दीक्षांत समारोह में पीएचडी की डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री मैरी एलिजाबेथ ट्रस ने डॉ. मैन्दोली को यह उपाधि प्रदान की। इस अवसर पर एलपीयू के संस्थापक एवं चांसलर, राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल तथा उनकी पत्नी व वाइस चांसलर श्रीमती रश्मि मित्तल भी मौजूद रहीं।

डॉ. मैन्दोली ने प्रोफेसर विजय कुमार छैछी (एलपीयू के डेप्युटी डीन) के मार्गदर्शन में 2025 में “उत्तराखंड में हैप्पीनेस करिकुलम को अपनाने वाले विद्यालयों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों में विकसित दक्षताएं: एक तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर शोध पूरा किया। यह शोध राज्य के विद्यालयी शिक्षा तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जो शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक विकास, जीवन कौशल, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देता है।

समग्र शिक्षा उत्तराखंड में स्टॉफ ऑफिसर के रूप में कार्यरत डॉ. मैन्दोली राज्य में ‘आनंदम पाठ्यक्रम’ के नोडल अधिकारी भी हैं। उनके शोध से सरकारी विद्यालयों में हैप्पीनेस करिकुलम के क्रियान्वयन, निगरानी और गुणवत्ता सुधार को नई दिशा मिलेगी। 58 वर्ष की आयु में पीएचडी प्राप्ति उनके सतत अध्ययन, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इससे पहले वे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोपेश्वर से वनस्पति विज्ञान में एमएससी में विश्वविद्यालय टॉपर रह चुके हैं, तथा बीएड, एमए (शिक्षाशास्त्र) और एमए (सामाजिक कार्य) जैसी डिग्रियां प्राप्त कर चुके हैं।

सामाजिक क्षेत्र में उनका परिवार भी सक्रिय है—सुपुत्र विपुल मैन्दोली भारतीय जनता युवा मोर्चा, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष हैं। डॉ. मैन्दोली की यह उपलब्धि उनके परिवार, शिक्षा विभाग और पूरे उत्तराखंड समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों व कर्मचारियों ने उन्हें बधाई दी, जबकि डॉ. मैन्दोली ने मार्गदर्शकों, अधिकारियों और शुभचिंतकों का आभार जताया। यह साबित करता है कि दृढ़ संकल्प से सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

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