रुड़की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कोर यूनिवर्सिटी, रुड़की में आयोजित नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक ने भारतीय खेलों को स्वर्णिम अध्याय प्रदान किया है, जहां अभूतपूर्व बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री ने इस प्रतियोगिता को दिव्यांगों की अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव बताते हुए कहा कि पावरलिफ्टिंग अनुशासन, धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने मुरलीकांत पेटकर (1972 पैरालंपिक स्वर्ण), सत्येंद्र सिंह लोहिया (इंग्लिश चैनल त्रिकोण), शीतल देवी (विश्व पैरा तीरंदाजी स्वर्ण), अवनी लेखरा-सुमित अंतिल (टोक्यो पैरालंपिक स्वर्ण), पेरिस 2024 (29 पदक) और दुबई एशियन यूथ पैरा गेम्स (110 पदक) जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। हाल ही में दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम ने कोलंबो में टी-20 विश्व कप-2025 जीता।
पद्मश्री दीपा मलिक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी रियो 2016 शॉटपुट रजत, बाइकिंग, तैराकी और रैली उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खेल नीतियों का श्रेय देते हुए कहा कि खेल बजट तीन गुना बढ़ा है और ‘खेलो इंडिया’ से ग्रामीण प्रतिभाएं उभर रही हैं।
उत्तराखंड का जिक्र करते हुए धामी ने पिछले वर्ष 38वें राष्ट्रीय खेलों में राज्य के 103 पदकों से सातवां स्थान प्राप्त करने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य अब ‘देवभूमि’ के साथ ‘खेलभूमि’ बन रहा है, जहां विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। दिव्यांग खिलाड़ियों के अभिभावकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार हर कदम पर उनके साथ है।
समारोह में खेल रत्न पद्मश्री दीपा मलिक, पैरालंपिक कमेटी के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग चेयरपर्सन जेपी सिंह, उपाध्यक्ष शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी चेयरमैन जेसी जैन, पैरा लिफ्टर परमजीत कुमार, अशोक और कस्तूरी उपस्थित रहे।

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