“राजस्व दुरुपयोग की जांच में देरी पर सवाल, प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बावजूद लोकायुक्त नियुक्ति नहीं”

विजय वर्धन डंडरियाल ने उत्तराखंड सरकार को चेताया- “नियुक्ति नहीं हुई तो न्यायालय का रास्ता अपनाऊंगा”

देहरादून । उत्तराखंड में राजस्व विभाग के संभावित दुरुपयोग की जांच और लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर एक नागरिक ने सरकार को चेतावनी भरे स्वर में सवाल खड़े किए हैं। विजय वर्धन डंडरियाल ने बताया कि उन्होंने 29 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री, कैबिनेट सचिव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को एक पत्र भेजकर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के एक पत्र के आधार पर लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की थी।

डंडरियाल के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय ने 5 जनवरी 2026 को मुख्य सचिव उत्तराखंड को निर्देश दिया कि इस शिकायत की जांच की जाए और जांच रिपोर्ट की एक प्रति प्रधानमंत्री पोर्टल पर भी अपलोड की जाए। उन्होंने कहा कि अब यह देखना है कि मुख्य सचिव इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
डंडरियाल ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति किस आधार पर और कैसे की जाती है, यह एक अहम मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में कोताही बरती गई या जांच में देरी हुई, तो वह मामला न्यायालय में ले जाएंगे।

डंडरियाल ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति किस आधार पर और कैसे की जाती है, यह एक अहम मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में कोताही बरती गई या जांच में देरी हुई, तो वह मामला न्यायालय में ले जाएंगे।

शिकायत का केंद्र वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी किया गया वह पत्र है, जिसमें उत्तराखंड में राजस्व संबंधी अनियमितताओं की लोकायुक्त से जांच कराने का सुझाव दिया गया था। डंडरियाल ने इसी को आधार बनाकर उच्च स्तर पर कार्रवाई की मांग की है।

डंडरियाल ने कहा कि वह उत्तराखंड सरकार और परिवहन अधिकारियों के खिलाफ अपनी शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रखेंगे। उन्होंने आगाह किया कि यदि जांच प्रक्रिया ठीक से नहीं चली या लोकायुक्त की नियुक्ति में हेराफेरी हुई, तो वह कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

यह मामला सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को रेखांकित करता है। डंडरियाल ने अपनी बात “देखते हैं कि मेरी शिकायतों पर उत्तराखंड सरकार क्या कार्रवाई करती है” कहकर समाप्त की। अब नजरें सरकार की ओर हैं कि वह इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाती है।

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