अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने की बैठक, सभी प्राइवेट वाहनों के अनापत्ति प्रमाण पत्र और विशेष पहचान चिह्न अनिवार्य होंगे; जनपद बागेश्वर की सराहना
देहरादून । राज्य के स्कूली बच्चों के आवागमन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर कड़े उपायों के निर्देश जारी किए। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जबकि अन्य जिलों के अधिकारी ऑनलाइन जुड़े।
बैठक का केंद्रीय एजेंडा उन सभी निजी वाहनों का सत्यापन, निगरानी और विनियमन था, जो स्कूलों से जुड़े बिना ही बच्चों को ढो रहे हैं। इनमें वैन, बसें, तीन पहिया वाहन, ऑटो और ई-रिक्शा शामिल हैं।
डॉ. गीता खन्ना ने स्पष्ट किया कि स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले हर निजी वाहन के लिए आरटीओ से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। प्रत्येक स्कूल को इन वाहनों व ड्राइवरों का पूरा डेटाबेस, उनकी मानसिक स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट सहित, अपने पास रखना होगा।
आयोग ने एक अहम सुझाव यह दिया कि ऐसे सभी वाहनों पर एक विशेष पीली पट्टी (यलो स्ट्रिप) का चिह्न लगाया जाए। इससे सड़क पर उनकी पहचान आसान होगी कि वह बच्चों को ले जा रहे हैं, साथ ही वाहन मालिक अन्य कामों के लिए भी इनका इस्तेमाल कर सकेंगे।
बैठक में जनपदवार कार्यवाही की समीक्षा की गई। डॉ. खन्ना ने बागेश्वर जनपद द्वारा इस दिशा में की गई प्रभावी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी इसी तर्ज पर काम करने को कहा। सभी जिलों से कहा गया है कि वे अपनी चुनौतियों और सुझाव आयोग के साथ साझा करें।
आयोग ने स्कूल प्रबंधनों की भी जवाबदेही तय की। निर्देश दिए गए हैं कि बड़े स्कूलों को अपने परिसर में पर्याप्त वाहन पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी, ताकि सड़कों पर जाम और दुर्घटनाओं को रोका जा सके। स्कूलों के पास यह जानकारी भी होनी चाहिए कि बच्चे किस परिवहन साधन से आ-जा रहे हैं।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि स्कूल बसों को दुर्घटना राहत कोष (एक्सीडेंट रिलीफ फंड) के दायरे में लाया जाए। साथ ही, खनन आदि के भारी वाहनों का चालन समय स्कूल आने-जाने के घंटों से अलग रखने के लिए समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा जोखिम में न पड़े।
डॉ. खन्ना ने बताया कि जल्द ही एक और व्यापक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें मुख्य शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, आरटीओ, एआरटीओ और अभिभावक संघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका लक्ष्य स्कूल परिवहन सुरक्षा के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक गाइडलाइन तैयार करना है।
इस अवसर पर आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल, अनुसचिव डॉ. सतीश कुमार सिंह, देहरादून के संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनीता चमोला व सहायक अधिकारी पंकज श्रीवास्तव मौजूद रहे।

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