मुंबई में दृष्टिकोण 2.0 के जरिए यूपीईएस ने इंडस्ट्री–एकेडेमिया सहयोग को आगे बढ़ाया

वरिष्ठ उद्योग नेताओं के लिए खास मंच पर चर्चा हुई कि एआई किस तरह एक्ज़ीक्यूटिव जजमेंट, टैलेंट और एजुकेशन को बदल रहा है

मुंबई। यूपीईएस देहरादून, जो एक अग्रणी मल्टी-डिसिप्लिनरी और रिसर्च यूनिवर्सिटी है, ने मुंबई में दृष्टिकोण के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। यूपीईएस ने दृष्टिकोण को एक लंबे समय के स्ट्रैटेजिक प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया है। यह एक इनवाइट-ओनली (निमंत्रण-आधारित), क्लोज़्ड-डोर लीडरशिप फोरम है—एक ऐसा “थिंकिंग रूम” जहाँ वरिष्ठ इंडस्ट्री लीडर्स और यूपीईएस का अकैडमिक लीडरशिप भविष्य के काम (फ्यूचर ऑफ वर्क), टैलेंट और लर्निंग पर खुलकर बातचीत करते हैं। यह मंच ऐसा माहौल बनाता है जहाँ लोग बेझिझक अपने विचार रखते हैं, मुश्किल सवालों पर जिम्मेदारी से बात होती है, और भविष्य से जुड़े आइडिया इंडस्ट्री और एजुकेशन के बीच बेहतर अलाइनमेंट में बदलते हैं। दृष्टिकोण को जानबूझकर इस तरह क्यूरेट किया जाता है कि बड़ी और प्रतिष्ठित ऑर्गनाइज़ेशन्स से चुनिंदा सीएक्सओ, बिज़नेस हेड्स और एक्सपर्ट एक जगह आएँ—स्पीचेज़ के लिए नहीं, बल्कि ईमानदार एक्सचेंज और प्रैक्टिकल इनसाइट के लिए।

दृष्टिकोण 2.0 का फोकस एआई-ड्रिवन दुनिया में लीडरशिप और लर्निंग पर था। “द कॉन्फ्लुएंस ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड ह्यूमन इंटेलिजेंस” थीम पर आधारित इस फोरम में अलग-अलग सेक्टर के सीनियर लीडर्स शामिल हुए। इनमें सुमित कपूर, पार्टनर, रिस्क एडवाइजरी, केपीएमजी इन इंडिया; समीर पितळवाला, हेड ऑफ गेमिंग – एपीएसी, गूगल क्लाउड; लक्ष्मी देशपांडे, हेड ऑफ एक्सआर इनोवेशन एंड डिज़ाइन, टीसीएस; जी. एस. सेल्विन, एग्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, रोल्स-रॉयस इन इंडिया एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, एमटीयू इंडिया; डॉ. निलय रंजन, हेड सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी, एयर इंडिया; हरजीत खंडूजा, एसवीपी – एचआर, जियो; अज़मीना पोद्दार, मैनेजिंग डायरेक्टर – एक्सपीरियंस डिज़ाइन, जेपीमॉर्गन चेज़; और रवि हेमनानी, वाइस प्रेसिडेंट – एचआर एंड हेड, टैलेंट एंड लर्निंग, नुवोको विस्टास कॉर्प. लिमिटेड शामिल रहे। बातचीत में यह देखा गया कि एआई किस तरह एक्ज़ीक्यूटिव डिसीजन-मेकिंग और ऑर्गनाइज़ेशनल कैपेबिलिटी को प्रभावित कर रहा है—और साथ ही यह भी कि ह्यूमन जजमेंट, एथिक्स, अकाउंटेबिलिटी और कन्सीक्वेन्स की अहमियत हमेशा बनी रहेगी।

सेशन की शुरुआत यूपीईएस के वाइस चांसलर डॉ. सुनील राय के वेलकम एड्रेस से हुई। इसके बाद यूपीईएस के रजिस्ट्रार मि. मनीष मदान और यूपीईएस अलायंसेज़ टीम ने कॉन्टेक्स्ट और सेशन ओवरव्यू रखा, और फिर फोरम कोर बोर्डरूम कन्वर्सेशन्स में आगे बढ़ा। इन बातचीतों को प्रो. राजीव नंदवानी, सीनियर डायरेक्टर, यूपीईएस स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस; प्रो. भास्कर भट्ट, डीन, स्कूल ऑफ डिज़ाइन; और डॉ. पद्मा वेंकट, डीन, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी ने कन्वीन किया। कार्यक्रम का समापन क्लोज़िंग नोट और ग्रुप फोटोग्राफ के साथ हुआ, जिसके बाद डिनर और इन्फॉर्मल डायलॉग हुआ।
इस शाम तीन आपस में जुड़ी बोर्डरूम कन्वर्सेशन्स हुईं।

पहली, एआई एंड एक्ज़ीक्यूटिव जजमेंट, जिसमें यह देखा गया कि एआई किस तरह एक्ज़ीक्यूटिव डिसीज़न्स को शेप कर रहा है—और किन जगहों पर लीडरशिप को साफ तौर पर तय करना होगा कि ह्यूमन जजमेंट के लिए क्लियर, नॉन-नेगोशिएबल बाउंड्रीज़ हों, खासकर अकाउंटेबिलिटी, एथिक्स और कॉन्टेक्स्चुअल इंटेलिजेंस के संदर्भ में।

दूसरी, द लर्निंग पैराडाइम एंड एआई-फर्स्ट टैलेंट, जिसमें शिफ्टिंग हायरिंग पैराडाइम्स, करिकुलम डिज़ाइन, स्टूडेंट एंगेजमेंट और इंस्टिट्यूशनल एआई स्टैक—जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटेलिजेंस, इंटीग्रेशन और इम्पैक्ट शामिल हैं—पर चर्चा हुई।

तीसरी और अंतिम, इंडस्ट्री–अकाडेमिया कन्वर्जेन्स, इस पर केंद्रित रही कि कोलैबोरेशन मॉडल्स को ट्रांज़ैक्शनल एंगेजमेंट से आगे बढ़कर को-क्रिएशन और फ्यूचर वर्कफोर्स डिज़ाइन के लिए शेयर्ड रिस्पॉन्सिबिलिटी की ओर जाना होगा—ताकि लॉन्ग-टर्म कैपेबिलिटी बिल्डिंग हो सके।

दृष्टिकोण 2.0 से एक साझा संदेश साफ निकला: एआई बहुत तेजी से वर्क को रेशेप करेगा, लेकिन आउटकम्स, अकाउंटेबिलिटी और ह्यूमन जजमेंट को सेंटर में रहना चाहिए। सुमित कपूर, पार्टनर, रिस्क एडवाइजरी, केपीएमजी इन इंडिया ने कहा, “एआई फैक्ट-बेस्ड डिसीज़न्स में मदद कर सकता है, लेकिन ह्यूमन्स को अकाउंटेबल रहना होगा। बोर्डरूम में, जहाँ हज़ारो समाधान उपलब्ध होते हैं, लीडर्स को टेबल पर इंटेलिजेंट प्रॉब्लम्स लाने होंगे, ताकि एआई की पोटेंशियल अनलॉक हो और आउटकम के संदर्भ में ट्रस्ट की एक लेयर बने। बिज़नेस लीडर्स के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे एंटरप्राइज़ एआई के साथ मीनिंगफुल कन्वर्सेशन्स करें, ताकि उसे सही तरीके से ट्रेन किया जा सके—कम्प्लेक्स इश्यूज़ सॉल्व करने और कैरेक्टर बिल्ड करने के लिए, जो एआई नहीं कर सकता।”

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए जी. एस. सेल्विन, एग्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, रोल्स-रॉयस इन इंडिया एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, एमटीयू इंडिया ने कहा, “एआई स्पीड, वॉल्यूम और कंसिस्टेंसी बढ़ा सकता है, लेकिन डिसीजन-मेकिंग में कॉन्टेक्स्ट, वैल्यूज़ और कन्सीक्वेन्स की जरूरत होती है—इसलिए ह्यूमन-इन-द-लूप नॉन-नेगोशिएबल है।” उन्होंने यह भी कहा, “एजुकेटर्स, प्रोफेशनल्स और इंडस्ट्री लीडर्स के तौर पर हमें स्किल-लेड डेवलपमेंट से शिफ्ट होकर प्रोडक्ट-फोकस्ड थिंकिंग की ओर जाना चाहिए, जो पर्पज़-लेड हो—ताकि बेहतर जजमेंट बने और बड़ा इम्पैक्ट क्रिएट हो।” इसमें जोड़ते हुए, अज़मीना पोद्दार, मैनेजिंग डायरेक्टर – एक्सपीरियंस डिज़ाइन, जेपीमॉर्गन चेज़ ने कहा, “लूप में इंसानी भूमिका कभी खत्म नहीं होने वाली। अब तक एआई और एजेंटिक सिस्टम्स ने जो भी हासिल किया है, और भले ही हम उन्हें बैकएंड ऑपरेशन्स में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हों, फिर भी हम उन्हें क्लाइंट्स के मामले में—खासकर फाइनेंशियल सेक्टर में—पूरा भरोसा नहीं देते।”

इस मौके पर यूपीईएस के वाइस चांसलर डॉ. सुनील राय ने कहा, “ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी न्यू-एज टेक्नोलॉजीज़ लीडरशिप, टैलेंट और लर्निंग को फंडामेंटली रेशेप कर रही हैं, यूपीईएस में हम इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं कि इसकी पोटेंशियल का इस्तेमाल करके सोसाइटी पर मीनिंगफुल पॉज़िटिव इम्पैक्ट बनाया जाए। हम सिर्फ स्टूडेंट्स को टुडे’ज़ रोल्स के लिए तैयार नहीं करते, बल्कि फ्यूचर ऑफ वर्क को डिफाइन करने वाली कन्वर्सेशन्स को शेप करने में भी योगदान देना चाहते हैं। दृष्टिकोण के जरिए डाइवर्स लीडर्स को एक साथ लाकर हमारा लक्ष्य है कि हम इंडस्ट्री के साथ क्लोज़ली अलाइन्ड रहें—खासतौर पर टैलेंट ऑफ टुमॉरो को शेप करने के क्रिटिकल पॉइंट्स पर, उनके ‘डिप्लॉयएबिलिटी’, करिकुलम और ट्रेनिंग पर फोकस के साथ।”

दृष्टिकोण यूपीईएस को एक ऐसे कन्वीनर के रूप में स्थापित करता है जो फ्यूचर-फेसिंग लीडरशिप डायलॉग को आगे बढ़ाता है—जहाँ ट्रस्ट, इनसाइट और शेयर्ड आउटकम्स के आधार पर लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक रिलेशनशिप्स बनते हैं—और एआई एरा में यूनिवर्सिटी–इंडस्ट्री कन्वर्जेन्स मजबूत होता है। दृष्टिकोण को प्रभावशाली बनाता है कि यह रियल पर्सपेक्टिव्स और इंडस्ट्री-एजुकेशन के बीच शार्पर अलाइनमेंट संभव करता है, जो यूपीईएस के “यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो” वाले फोकस से जुड़ा है—ताकि ऐसे लीडर्स तैयार हों जो आगे आने वाले समय को शेप करें।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें: www.upes.ac.in

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