देहरादून । देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में शुमार जनगणना अब डिजिटल दौर में प्रवेश करने जा रही है। उत्तराखंड में आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और इस बार नागरिकों को एक ऐतिहासिक सुविधा मिलने जा रही है। पहली बार लोग घर बैठे खुद अपनी जनगणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) कर सकेंगे, जिससे यह प्रक्रिया पारदर्शी, सुगम और सटीक बनने की उम्मीद है।
जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा तैयार की गई संभावित समय-सारिणी के अनुसार, 9 अप्रैल 2026 को स्वगणना पोर्टल लॉन्च कर दिया जाएगा। इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक प्रदेश में प्रथम चरण का कार्य शुरू होगा, जिसमें मकान सूचीकरण और गणना की जाएगी। बर्फबारी वाले इलाकों (स्नोबाउंड एरिया) में सितंबर में गणना होगी, जबकि जनसंख्या गणना का मुख्य कार्य अगले साल 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक संपन्न कराया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। नागरिकों को सबसे पहले जनगणना पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर और ओटीपी के जरिए लॉगिन करना होगा। इसके बाद उनके सामने मकान और उसमें उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े 31 सवालों की एक डिजिटल प्रश्नावली खुलेगी। इन सवालों का ईमानदारी से जवाब देने के बाद फॉर्म सबमिट करते ही उनके मोबाइल पर एक यूनिक आईडी नंबर भेज दिया जाएगा। इसके बाद जब प्रगणक (एन्यूमरेटर) सत्यापन के लिए घर आएंगे, तो उन्हें यह यूनिक नंबर दिखाना होगा। बस, इतना करते ही पोर्टल पर पहले से दर्ज सारी जानकारी अपने आप सिंक हो जाएगी और प्रगणक को बार-बार सवाल नहीं करने होंगे।
मकान सूचीकरण के दौरान पूछे जाने वाले 31 सवाल मूल रूप से हर परिवार की भौतिक सुविधाओं और संपत्तियों की तस्वीर पेश करेंगे। इसमें भवन से जुड़ी जानकारियां जैसे मंजिलों की संख्या, छत और दीवारों की निर्माण सामग्री, मालिकाना हक और कमरों की संख्या शामिल है। वहीं बुनियादी सुविधाओं के तहत पेयजल स्रोत, बिजली, शौचालय, ड्रेनेज सिस्टम, रसोई घर और एलपीजी या पीएनजी की उपलब्धता के बारे में पूछा जाएगा।
इसके अलावा परिवार के पास मौजूद संपत्तियों जैसे रेडियो, टीवी, कंप्यूटर या लैपटॉप, इंटरनेट कनेक्शन, लैंडलाइन या मोबाइल फोन, साइकिल, स्कूटर और कार का भी ब्योरा लिया जाएगा। परिवार के मुखिया का नाम और परिवार के सदस्यों की संख्या भी इसी फॉर्म का हिस्सा होगी।
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार जनगणना में जनभागीदारी सुनिश्चित करना सबसे बड़ा लक्ष्य है। स्वगणना की सुविधा से न केवल नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रगणकों का कीमती समय भी बचेगा। फिलहाल अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण का काम जारी है। राज्य सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है, जिसके बाद जनगणना का यह डिजिटल महाअभियान धरातल पर उतर जाएगा।

Recent Comments