नैनीताल /हल्द्वानी। न्यायालय के शीर्ष पर बैठी संवैधानिक पीठ ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे के स्वामित्व वाली लगभग 30 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट रूप से यह रेखांकित किया कि सरकारी संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले व्यक्ति उसी स्थान पर बने रहने का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने रेलवे के इस अधिकार को मान्यता दी कि वह अपनी भूमि का उपयोग विकास परियोजनाओं के लिए कर सकता है।
हालांकि, न्यायालय ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए एक ठोस रूपरेखा भी प्रस्तुत की है। आदेश के अनुसार, इन परिवारों की औपचारिक पहचान की जाएगी, जिसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवास प्राप्त करने के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए रमजान के महीने की समाप्ति के बाद, 19 मार्च 2026 से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जहां पात्र परिवार अपने आवेदन जमा कर सकेंगे।
गौरतलब है कि यह विवाद लगभग दो दशकों से चला आ रहा था। वर्ष 2007 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके बाद से यह मामला विभिन्न चरणों से गुजरता रहा। इस क्षेत्र में गफूर बस्ती, ढोलक बस्ती और इंदिरा नगर जैसी बस्तियों में रेलवे की जमीन पर हजारों अवैध निर्माण हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं। फरवरी 2024 में अतिक्रमण हटाने के प्रयास के दौरान हुई हिंसा के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था, जहां पिछली कई सुनवाइयों में पुनर्वास पर बल दिया गया था।
इस फैसले के बाद हल्द्वानी प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से व्यापक इंतजाम किए हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र में पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है और ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी भी की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि न्यायालय के आदेश को शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से लागू किया जाएगा, तथा प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इस फैसले से हजारों परिवारों का भविष्य प्रभावित होगा, लेकिन अदालत ने पुनर्वास का रास्ता खोलकर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है।

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