पुराने बैचों को पहले अवसर दो: 84वें दिन भी जारी रहा नर्सिंग अधिकारियों का धरना

8 मार्च को बहल चौक से मुख्यमंत्री आवास तक निकलेगी शांतिपूर्ण रैली

देहरादून। प्रदेश में वर्षवार भर्ती प्रणाली को पुनः लागू करने की मांग को लेकर नर्सिंग अधिकारियों का आंदोलन सोमवार को 84वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से जारी इस धरने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे अभ्यर्थियों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी और नियमों में बार-बार बदलाव के कारण हजारों प्रशिक्षित युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उनका आरोप है कि पूर्व भर्तियों में पारदर्शिता की कमी और प्रक्रियागत खामियों के चलते कई योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित रह गए।
नर्सिंग अधिकारियों की मुख्य मांग है कि भर्ती नियमों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन लागू करने से पहले सभी लंबित बैचों को वर्षवार भर्ती प्रणाली के तहत अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि जब तक पुराने बैचों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।
इसके साथ ही रिक्त पड़े पदों को भी वर्षवार क्रम में भरने की मांग दोहराई गई। आंदोलनकारियों का तर्क है कि यदि शेष पदों पर भी वर्षवार भर्ती नहीं की गई तो वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।
आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए नर्सिंग अधिकारियों ने घोषणा की है कि 8 मार्च, महिला दिवस के अवसर पर वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर बहल चौक से मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण रैली निकाली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
धरना स्थल पर नवल पुंडीर, विकास पुंडीर, प्रवेश रावत, भास्कर, प्रीति धीमान, पपेंद्र, राणा, कुलदीप, सुभाष रावत, श्वेता, साधना, प्रियंका, दिनेश, अल्का, शिरा बंधानी और भारती सहित बड़ी संख्या में बेरोजगार नर्सिंग अधिकारी मौजूद रहे।

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