डेपुटेशन का उल्टा गणित: पिछले साल डिबार हुए IPS को अब सरकार ने खुद भेजा केंद्र, दो अफसर रिलीव
देहरादून। उत्तराखैंड पुलिस के तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति ने एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरण पैदा कर दिया है। दिलचस्प यह है कि ये वही अधिकारी हैं, जो पिछले साल केंद्रीय डेपुटेशन का आदेश आने के बाद जॉइन न करने के कारण पांच साल के लिए प्रतिबंधित (डिबार) कर दिए गए थे।
अब राज्य सरकार ने पहल करते हुए 16 फरवरी 2026 को इन तीनों के नाम केंद्र को भेजे, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने पांच मार्च को इनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। आदेश जारी होते ही राज्य सरकार ने तेजी दिखाते हुए आईपीएस नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को शुक्रवार को रिलीव कर दिया, जबकि आदेश गुरुवार शाम को आए थे।
केंद्र ने इनकी तैनाती अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों में की है। मुख्तार मोहसिन (आईपीएस 2005) को एनसीआरबी, नीरू गर्ग (आईपीएस 2005) को आईटीबीपी और अरुण मोहन जोशी (आईपीएस 2006) को बीएसएफ में डीआईजी पद पर भेजा गया है।
गृह सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि तीनों अधिकारियों को केंद्रीय सेवा में बुलाए जाने की पुष्टि हो गई है। उन्होंने कहा, “आईपीएस अरुण मोहन जोशी और नीरू गर्ग को शासन स्तर से रिलीव कर दिया गया है। आगे की औपचारिकताएं पुलिस मुख्यालय पूरी करेगा। आईपीएस मुख्तार मोहसिन को तकनीकी वजहों से फिलहाल रिलीव नहीं किया गया है, उन पर भी जल्द निर्णय ले लिया जाएगा।”
इस डेपुटेशन की सबसे बड़ी चर्चा पद स्तर को लेकर है। ये तीनों अधिकारी उत्तराखंड में आईजी के पद पर हैं, जबकि केंद्र में इन्हें डीआईजी स्तर की नियुक्ति मिली है। केंद्र में आईजी पद नामित होने तक इन्हें डीआईजी के रूप में ही काम करना होगा।

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