देहरादून। उत्तराखंड में राज्य सरकार की आय बढ़ाने में आबकारी विभाग लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार हर वर्ष इस विभाग से बड़े स्तर पर राजस्व संग्रह की अपेक्षा रखती है। इसी कारण आबकारी विभाग को प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।
वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए सरकार ने आबकारी विभाग को लगभग 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य सौंपा था। यह लक्ष्य शुरुआत में चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रियता, बेहतर निगरानी और व्यवस्थागत सुधारों के चलते इस लक्ष्य को लगभग हासिल कर लिया गया है।
राज्य के विभिन्न जिलों में आबकारी विभाग की टीमें लगातार राजस्व संग्रह की प्रक्रिया को मजबूत करने में लगी हुई हैं। शराब की दुकानों के संचालन, लाइसेंस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन, अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई और नियमित निरीक्षण जैसे उपायों के माध्यम से विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने से राजस्व बढ़ाने में काफी मदद मिली है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिलों में तैनात अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। लाइसेंस व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
पिछले लक्ष्य के लगभग पूरा होने के बाद अब सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए भी आबकारी विभाग के सामने नया लक्ष्य तय करने की तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अनुभवी अधिकारियों की टीम और बेहतर प्रशासनिक रणनीति के बल पर विभाग आने वाले समय में भी राजस्व संग्रह के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
राज्य में अक्सर यह कहा जाता है कि जब भी सरकार को अतिरिक्त आय की आवश्यकता होती है तो उसकी सबसे बड़ी उम्मीद आबकारी विभाग से ही जुड़ी होती है। इसी कारण इसे प्रदेश की आय का प्रमुख स्रोत और सरकार की आर्थिक मजबूती का अहम आधार भी माना जाता है।

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