100 दिन का इतिहास, अनिश्चित भविष्य
देहरादून। प्रदेश में वर्षवार भर्ती प्रणाली की बहाली की मांग को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थियों का शांतिपूर्ण धरना आज ऐतिहासिक 100वें दिन में प्रवेश कर गया। तीन माह से अधिक समय से जारी इस आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं आने से हजारों प्रशिक्षित युवाओं में रोष व्याप्त है। धरना स्थल पर शनिवार को विशेष रूप से उत्साह देखा गया, जहां अभ्यर्थियों ने एक दूसरे को 100 दिन पूरे होने की बधाई देने के साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
गत 100 दिनों से नर्सिंग अभ्यर्थी धूप, बारिश और सर्दी की परवाह किए बिना अपनी मांगों को लेकर डटे हैं। इन युवाओं का कहना है कि प्रदेश में कई बैच वर्षों से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन वर्षवार भर्ती प्रणाली लागू न होने के कारण हजारों योग्य युवा बेरोजगार हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि सभी लंबित बैचों को वर्षवार भर्ती प्रणाली के तहत समायोजित किया जाए तथा स्वास्थ्य विभाग में रिक्त चल रहे हजारों पदों को इसी क्रम में भरा जाए।
अभ्यर्थियों ने गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र से काफी उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन विधानसभा में उनकी मांग को लेकर कोई ठोस चर्चा न होने से मायूसी छा गई। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमने 100 दिन तक शांतिपूर्वक संघर्ष किया। हमें लगा था कि सरकार बजट सत्र में हमारी समस्या का समाधान कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब हमें अपने आंदोलन को और मजबूती देने का समय आ गया है।”
नर्सिंग अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही वर्षवार भर्ती बहाल करने का निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के नर्सिंग अभ्यर्थी एकजुट होकर बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी और हजारों युवाओं के सपनों से जुड़ा मामला है। अभ्यर्थी नवल पुंडीर ने कहा, “100 दिन हो गए, हम धैर्य की हर सीमा पार कर चुके हैं। अब सरकार को जवाब देना होगा। या तो हमारी मांगें मानी जाएं या फिर प्रदेश बड़ा आंदोलन देखने को तैयार रहे।”
100वें दिन धरना स्थल पर खासा उत्साह देखने को मिला। नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, राम शंकर, सुभाष रावत, जतिन, आरती व्यास, सुजाता, सपना राठौर, पप्पेंद्र बिष्ट, भारती, भूपेंद्र, प्रीति सहित सैकड़ों नर्सिंग अभ्यर्थियों ने एकजुटता दिखाई। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक वर्षवार भर्ती बहाल नहीं होती, यह आंदोलन ऐसे ही चलता रहेगा।

Recent Comments