देहरादून। रानीपोखरी क्षेत्र में स्थित भट्ट नगरी/लिस्ट्राबाद में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी यानि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए आरक्षित भूमि को किसी अन्य संस्था या उद्देश्य के लिए आवंटन किए जाने के विरोध में धरना-प्रदर्शन जारी है।मंगलवार को यह धरना 37वें दिन में प्रवेश कर गया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। स्थानीय लोगों और संगठनों के इस आंदोलन को अब पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का खुला समर्थन मिल गया है।
श्री रावत ने धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया और मांग की कि सरकार विश्वविद्यालय के लिए चिह्नित भूमि को किसी भी कीमत पर अन्यत्र आवंटित न होने दे। हरक सिंह रावत ने कहा कि 22 अप्रैल 2019 में रानीपोखरी में विधि विवि स्वीकृत की गई थी। जिसका शिलान्यास क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा किया गया था। दुर्भाग्य से करीब छह वर्ष बाद भी इसका काम शुरू नहीं किया जा सका है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उत्तराखंड राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का शिलान्यास और गजट नोटिफिकेशन तो हो गया, लेकिन आज छह साल बीत जाने के बाद भी इस भूमि पर एक ईंट नहीं लगी।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भूमि का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। “यदि सरकार ने जल्द ही इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को उग्र रूप देना पड़ेगा। हम इस लड़ाई में पूरी तरह से आंदोलनकारियों के साथ हैं।”
बता दें कि रानीपोखरी क्षेत्र में स्थापित होने वाला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लंबे समय से प्रतीक्षित परियोजना रही है। स्थानीय नागरिकों, छात्र संगठनों और नागरिक मोर्चों का कहना है कि यदि इस भूमि का आवंटन किसी अन्य गैर-शैक्षणिक या व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया गया, तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए यह विश्वविद्यालय मील का पत्थर साबित हो सकता था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह परियोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
हरक सिंह रावत के धरना स्थल पर पहुंचने के बाद आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई ऊर्जा मिली है। स्थानीय निवासी, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और नागरिक बड़ी संख्या में धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा और प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक वार्ता या बयान नहीं आया है।

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