निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग

देहरादून(आरएनएस)।  यूकेडी ने निजी स्कूलों की मनमानी और अनावश्यक फीस वृद्धि, किताबों का बोझ जैसे मुद्दों के साथ बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यूकेडी कार्यकर्ता डीएम कार्याल के दोनों गेटों से आगे बढ़े। जिस पर यूकेडी कार्यकर्ताओं की सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्युष कुमार के साथ तीखी नोंक झोंक भी हुई। यूकेडी के महानगर अध्यक्ष प्रवीण चंद रमोला के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं का कहना था कि शीघ्र ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। प्रत्येक वर्ष यह देखा जाता है कि दून के अनेक निजी विद्यालय अभिभावकों पर मनमानी फीस वृद्धि का दबाव बनाते हैं।

इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए महंगी एवं अनावश्यक पुस्तकों, कॉपियों, यूनिफॉर्म तथा अन्य शैक्षणिक सामग्री की लंबी सूची जारी कर दी जाती है। कई विद्यालय अभिभावकों को किसी एक निर्धारित दुकान या विक्रेता से ही किताबें, कॉपियां एवं यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे इन वस्तुओं की कीमत सामान्य बाजार की तुलना में काफी अधिक हो जाती है। केंद्रीय महामंत्री किरन रावत ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा एडमिशन फीस, डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी फीस, स्मार्ट क्लास फीस आदि के नाम पर विभिन्न प्रकार के अतिरिक्त शुल्क भी लिए जा रहे हैं, जिनकी पारदर्शिता भी स्पष्ट नहीं होती। महानगर संगठन मंत्री कपिल कुमार ने सभी निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर तत्काल रोक की मांग की। यूकेडी ने विभिन्न मांगों से जुड़ा मांग पत्र भी सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।

प्रदर्शन में केंद्रीय महामंत्री रघुवीर सिंह राणा, महानगर उपाध्यक्ष अनिल भंडारी, महानगर महामंत्री राजीव नौटियाल, निश्चित मनराल, महानगर संगठन मंत्री अनूप बिष्ट, भोला चमोली, गजेंद्र नेगी, प्रेम पडियार, गिरीश कोठारी, वार्ड अध्यक्ष बंजारावाला संतोष नौटियाल, रीता देवी, सुमन नेगी, शुभम सेमवाल, राजेश्वरी रावत, किशोर बहुगुणा मौजूद रहे।

ये है मांग पत्र की मांगे-

सभी स्कूल एससीईआरटी अथवा मानक पाठ्यपुस्तकों को लागू करें। अभिभावकों को महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।-अभिभावकों को किसी एक निर्धारित दुकान से किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।-एडमिशन फीस, डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी फीस, स्मार्ट क्लास फीस की जांच कर उन पर प्रशासनिक नियंत्रण किया जाए।-स्कूल बसों एवं अन्य परिवहन सेवाओं की फीस निर्धारित की जाए।-यदि किसी विद्यार्थी की फीस किसी कारणवश बकाया रह जाती है, तो उसे अगली कक्षा में प्रवेश देने से न रोका जाए, अभिभावकों को किस्तों में फीस जमा करने की सुविधा दी जाए।

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