रुद्रपुर। पुलिस महानिरीक्षक कुमायूँ परिक्षेत्र, नैनीताल श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल की अध्यक्षता में आज पुलिस लाइन रुद्रपुर में कुमायूँ परिक्षेत्र के समस्त जनपद प्रभारियों के साथ परिक्षेत्रीय मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं, तकनीकी कार्यवाहियों और बीट पुलिसिंग सहित 46 बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई।
गोष्ठी के दौरान आईजी अग्रवाल ने वर्ष 2015 से पूर्व के एनडीपीएस एक्ट के मामलों एवं मालों के विधिक निस्तारण की समीक्षा करते हुए शीघ्र एवं समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 2024 एवं उससे पूर्व से दाखिल वाहनों के निस्तारण में प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, 02 से 03 वर्ष एवं 03 वर्ष से अधिक समय से लंबित/पार्ट पेंडिंग पुनः विवेचनाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से निपटाने के निर्देश दिए गए।
भूमि धोखाधड़ी (लैण्ड फ्रॉड) के मामलों में समिति/राजपत्रित अधिकारी की संस्तुति के पश्चात दर्ज अभियोगों में अन्तिम रिपोर्ट की गुणवत्ता, साक्ष्य संकलन एवं विवेचना की पारदर्शिता की समीक्षा की गई। वहीं, न्यायालय के आदेश अथवा बिना संस्तुति दर्ज अभियोगों में अन्तिम रिपोर्ट की वैधानिकता एवं प्रक्रियात्मक शुद्धता पर विशेष बल दिया गया।
आईजी ने ऑपरेशन स्माइल के अन्तर्गत गुमशुदा/लापता व्यक्तियों की बरामदगी हेतु तकनीकी संसाधनों के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए। अज्ञात शवों की शिनाख्त हेतु प्रभावी कार्यवाही एवं अन्तरजनपदीय समन्वय बढ़ाने पर बल दिया गया। वांछित एवं ईनामी अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु सघन अभियान चलाने तथा आवश्यकतानुसार कुर्की/घोषणा की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
गोष्ठी में NAFIS एवं MCU में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा कर तकनीकी दक्षता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। धारा 107 BNSS, धारा 14(1) गैंगस्टर एक्ट, 68(क) NDPS एवं PIT NDPS के अन्तर्गत सम्पत्ति जब्तीकरण की कार्यवाही की समीक्षा की गई। वर्ष 2025 एवं 2026 में धारा 111 एवं 112 BNS के अन्तर्गत की गई कार्यवाही की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

पुलिस मुख्यालय तथा परीक्षेत्रीय कार्यालय से चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा के साथ-साथ पुलिस कार्मिकों के ऑनलाईन एसीआर, जीपीएफ, चिकित्सा प्रतिपूर्ति की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई।
क्षेत्राधिकारियों के कार्यों से सम्बन्धित बिन्दुओं—कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जनसंपर्क, विवेचना गुणवत्ता आदि की समीक्षा कर आवश्यक सुधार हेतु निर्देश दिए गए। आईजी ने बीट पुलिसिंग को आधारभूत पुलिसिंग का मुख्य स्तंभ बताते हुए इसे और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाए जाने हेतु निर्देशित किया। बीट आरक्षियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण, स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद, संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान एवं सत्यापन की कार्यवाही को प्राथमिकता देने हेतु निर्देश दिए गए। साथ ही बीट सूचना तंत्र को मजबूत करते हुए अपराध की रोकथाम में इसकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
गोष्ठी में उत्तराखण्ड यौन अपराध पीड़िता प्रतिकर योजना 2020, एससी/एसटी एक्ट एवं “हिट एंड रन” योजना 2022 के अन्तर्गत की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई। केस ऑफिसर स्कीम के अंतर्गत महत्वपूर्ण एवं चिन्हित प्रकरणों की प्रभावी पैरवी हेतु केस ऑफिसरों एवं अभियोजन तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए। ऐसे प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग कर समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया, जिससे दोषियों को शीघ्र दंडित कराया जा सके एवं न्याय प्रणाली में आमजन का विश्वास सुदृढ़ हो।
गोष्ठी के दौरान आईजी ने सभी जनपद प्रभारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जनसामान्य की समस्याओं के त्वरित समाधान, अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु निरंतर प्रभावी कार्यवाही की जाए।
अंत में, सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय, उत्तरदायित्व एवं जनसेवा की भावना के साथ कार्य करते हुए पुलिस की छवि को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु प्रेरित किया गया। साथ ही बीट स्तर तक पुलिसिंग को मजबूत करते हुए न्यायालयीय कार्यवाहियों में प्रभावी पैरवी के माध्यम से त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
गोष्ठी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मन्जूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर अजय गणपति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा चन्द्रशेखर घोड़के, पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ अक्षय प्रहलाद कोंडे, पुलिस अधीक्षक चम्पावत श्रीमती रेखा यादव, पुलिस अधीक्षक बागेश्वर जितेन्द्र कुमार मेहरा, पुलिस अधीक्षक अपराध ऊधमसिंहनगर जितेन्द्र सहित अन्य जनपदों के राजपत्रित अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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